Bharat Express DD Free Dish
Pension Mission Shakti Digital
Pension Mission Shakti Digital

चंद्रशेखर रावण ने संसद में पूछ लिया बड़ा सवाल- संविधान में ‘भारत’ है, तो नेता क्यों कहते हैं ‘हिंदुस्तान’ ?

चंद्रशेखर रावण ने संविधान की गरिमा पर जोर देते हुए कहा कि यह दस्तावेज न केवल हमारे अधिकार बल्कि कर्तव्यों की भी बात करता है. उन्होंने जातिगत भेदभाव तथा वंचित वर्गों की उपेक्षा पर सरकार को घेरा.

Chandrashekhar Azad Ravan

संविधान पर चर्चा के दौरान नगीना सांसद चंद्रशेखर रावण

संसद में संविधान पर चर्चा के दौरान भीम आर्मी के प्रमुख और नगीना से सांसद चंद्रशेखर रावण ने हरे रंग की संविधान की प्रति हाथ में लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा किया. उन्होंने पूछा कि क्या हम संविधान के दायरे में रहते हुए चर्चा कर रहे हैं, और क्यों “भारत” की जगह “हिंदुस्तान” कहा जा रहा है, जबकि संविधान में ऐसा उल्लेख नहीं है?

संविधान की चर्चा में भारत बनाम हिंदुस्तान का मुद्दा

चंद्रशेखर रावण (Chandrashekhar Ravan) ने संविधान सभा के हवाले से भारत को “BHARAT” कहने की बात दोहराई. उनका कहना था कि बड़े नेता और विचारक संविधान का सम्मान तो करते हैं, लेकिन इसका सही संदर्भ देने में झिझकते हैं. उन्होंने कहा कि संविधान में “India that is Bharat” लिखा है, “हिंदुस्तान” नहीं.

संविधान और सामाजिक समानता का सवाल

रावण ने संविधान की पृष्ठभूमि और बाबा साहेब अंबेडकर के योगदान की चर्चा की. उन्होंने कहा कि संविधान लागू होने के 75 साल बाद भी हम सामाजिक और आर्थिक समानता प्राप्त नहीं कर पाए हैं. उन्होंने कहा कि संविधान ने राजनीतिक समानता दी, लेकिन सामाजिक और आर्थिक असमानता अभी भी बनी हुई है. गरीब और वंचित वर्गों के साथ भेदभाव आज भी जारी है.

दलित, आदिवासी, और ओबीसी समुदाय के लिए अधिकारों की बात

 

चंद्रशेखर रावण ने सवाल किया कि क्या आज भी दलितों और आदिवासियों को उनके संवैधानिक अधिकार पूरी तरह से मिले हैं?

  • आरक्षण और प्रमोशन में देरी

उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद आरक्षण लागू करने में देरी की जा रही है.

  • महिला और दलित मुख्यमंत्री

उन्होंने पूछा कि कितने दलित मुख्यमंत्री और महिला मुख्यमंत्री सरकार ने बनाए हैं?

धार्मिक स्वतंत्रता और छत्तीसगढ़ का मामला

उन्होंने छत्तीसगढ़ के सतनामी समाज का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि संविधान में दिए गए धार्मिक अधिकारों (Rligious Rights) का सम्मान नहीं हो रहा है. उन्होंने कहा कि समाज के लोगों को उनकी धार्मिक आजादी के लिए अपमानित किया गया और जेल में डाल दिया गया.

संसदीय जिम्मेदारियां और राजनीतिक दलों की भूमिका

रावण ने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी थी कि वे संविधान को व्यवहार में लाते, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. उन्होंने जाति आधारित भेदभाव और वंचित वर्गों के साथ हो रहे अन्याय की ओर ध्यान दिलाया. उन्होंने संसद में बैठे ओबीसी और दलित नेताओं से आग्रह किया कि वे अपने वर्गों के लिए ईमानदारी से काम करें.

संविधान की उपलब्धियां और चुनौतियां

उपलब्धियां-

  • संविधान ने वंचित वर्गों को समान अधिकार दिए.
  • एक आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनीं, यह संविधान की सफलता का प्रमाण है.

चुनौतियां

  • आज भी जातिगत भेदभाव और आर्थिक असमानता बनी हुई है.
  • सामाजिक न्याय और समानता के लक्ष्यों को पूरी तरह से हासिल नहीं किया जा सका.

संविधान के प्रति ईमानदारी जरूरी

चंद्रशेखर रावण ने बाबा साहेब के कथन को याद दिलाया कि स्वतंत्रता आनंद का विषय है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारियां भी आती हैं. उन्होंने सरकार और जनता दोनों से संविधान के प्रति निष्ठा बनाए रखने की अपील की. उनका कहना था कि संविधान ने हमें अधिकार दिए हैं, लेकिन हमें अपने कर्तव्यों को भी समझना होगा.

चंद्रशेखर रावण के भाषण की खास बात

चंद्रशेखर रावण का यह भाषण संविधान की महानता और उसकी चुनौतियों पर ध्यान दिलाने वाला था. उन्होंने सरकार, राजनीतिक दलों, और समाज से आग्रह किया कि वे संविधान को केवल एक दस्तावेज न समझें, बल्कि इसे अपने जीवन में अपनाएं.

यहां देखें चंद्रशेखर रावण का पूरा वीडियो 

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Pension Mission Shakti Digital