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Dr. B.R. Ambedkar

14 अक्टूबर 1956 को नागपुर की दीक्षाभूमि में डॉ. भीमराव आंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाकर जातिगत भेदभाव के खिलाफ एक ऐतिहासिक संदेश दिया. जानिए इस ऐतिहासिक घटना के पीछे की वजह, नागपुर को चुनने का कारण और आज भी लाखों लोगों के लिए इसकी अहमियत.

हर साल 26 नवंबर को भारत में संविधान दिवस मनाया जाता है. इस वर्ष संविधान की 76वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई नेताओं ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं.

"हमारा संविधान-हमारा स्वाभिमान सम्मेलन" में युवाओं को संविधान की रक्षा का संकल्प दिलाते हुए सुदेश कटारिया ने कहा कि संविधान केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि दलितों, वंचितों और गरीबों के अधिकारों का संरक्षक ग्रंथ है.

CJI जस्टिस बी.आर. गवई ने ऑक्सफोर्ड यूनियन में भारतीय संविधान को सामाजिक क्रांति का प्रतीक बताया. उन्‍होंने कहा- भारत में संविधान निर्माता डॉ. आंबेडकर की दूरदर्शिता और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से वंचितों को न्याय और प्रतिनिधित्व मिला.

बिलासपुर (यमुनानगर) में "हमारा संविधान हमारा स्वाभिमान" जनसभा में डॉ. अंबेडकर जी को श्रद्धांजलि, दलित समाज के उत्थान हेतु भाजपा सरकार के कार्यों और पारदर्शी नीतियों पर प्रकाश डाला गया.

Dr. Ambedkar First Memorial Lecture: डॉ. अंबेडकर की 134वीं जयंती पर DAIC में पहला स्मृति व्याख्यान आयोजित हुआ. जस्टिस गवई ने कहा- "आज मैं जो भी हूं, वह महान व्यक्तित्व डॉ. भीमराव अंबेडकर और संविधान की देन है."

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर आंबेडकर विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि इन पार्टियों ने हमेशा दलितों और वंचितों के अधिकारों का हनन किया है.

चंद्रशेखर रावण ने संविधान की गरिमा पर जोर देते हुए कहा कि यह दस्तावेज न केवल हमारे अधिकार बल्कि कर्तव्यों की भी बात करता है. उन्होंने जातिगत भेदभाव तथा वंचित वर्गों की उपेक्षा पर सरकार को घेरा.