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15 साल की दुश्मनी, कई हत्याएं और गोलियों की गूंज… जानिए चरखी दादरी के कासनी-काला गैंग की पूरी कहानी

Charkhi Dadri Gangwar: हरियाणा के चरखी दादरी में एक बार फिर गैंगवार की पुरानी कहानी सामने आ गई है. गुरुवार को शहर थाना के बाहर खड़ी एक स्कॉर्पियो पर बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. इस हमले में प्रदीप कासनी गैंग से जुड़े 7 लोग घायल हो गए, जिनमें 2 की हालत गंभीर बताई जा रही है.

Charkhi Dadri Gangwar

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Charkhi Dadri Gangwar: हरियाणा के चरखी दादरी में एक बार फिर गैंगवार की पुरानी कहानी सामने आ गई है. गुरुवार को शहर थाना के बाहर खड़ी एक स्कॉर्पियो पर बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. इस हमले में प्रदीप कासनी गैंग से जुड़े 7 लोग घायल हो गए, जिनमें 2 की हालत गंभीर बताई जा रही है. पुलिस ने बाद में तीन शूटरों की मदद करने के आरोप में रोहित नाम के एक युवक को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया है.

यह हमला अचानक जरूर हुआ, लेकिन इसके पीछे की दुश्मनी नई नहीं है. चरखी दादरी में प्रदीप कासनी और सत्येंद्र उर्फ काला गैंग के बीच करीब 15 साल से खूनी रंजिश चली आ रही है. इन सालों में कई हत्याएं हुईं, खुलेआम गोलियां चलीं और हर वारदात के बाद बदले की नई कहानी शुरू होती गई.

गैंगवार के लिए लंबे समय से चर्चा में रहा इलाका

चरखी दादरी के साथ भिवानी और झज्जर का इलाका भी लंबे समय से इस गैंगवार का असर देखता रहा है. इस पूरी लड़ाई में सबसे ज्यादा चर्चा प्रदीप कासनी और सत्येंद्र उर्फ काला के नाम की हुई.

दोनों गैंग के लोग समय-समय पर एक-दूसरे को निशाना बनाते रहे. एक हत्या के बाद दूसरी तरफ से जवाबी हमला होता और फिर बदले का सिलसिला आगे बढ़ जाता. धीरे-धीरे यह रंजिश दो लोगों की निजी दुश्मनी से निकलकर दो गैंगों की लड़ाई में बदल गई.

2011 के दोहरे हत्याकांड से शुरू हुई रंजिश

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच दुश्मनी की शुरुआत साल 2011 में हुई थी. चरखी दादरी के कासनी गांव में उस समय 2 लोगों की हत्या कर दी गई थी. मरने वालों में प्रदीप कासनी का भाई संदीप कासनी और राजेंद्र शामिल थे.

इस हत्याकांड में साहूवास गांव के रहने वाले सत्येंद्र उर्फ काला का नाम सामने आया. काला को बाद में जेल भेजा गया, लेकिन कुछ साल बाद वह जमानत पर बाहर आ गया. उधर, भाई की हत्या के बाद प्रदीप कासनी के मन में बदले की आग बढ़ती गई.

यहीं से दोनों पक्षों के बीच शुरू हुई दुश्मनी आने वाले सालों में और ज्यादा हिंसक हो गई.

2016 में खिलावनचंद की हत्या

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक अगस्त 2016 में प्रदीप कासनी ने अपने भाई संदीप की हत्या का बदला लेने के लिए ढाणी फौगाट निवासी खिलावनचंद को निशाना बनाया. खिलावनचंद का नाम संदीप हत्याकांड के आरोपियों में था. उसे एक मंदिर परिसर में गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया. लेकिन मामला यहीं नहीं रुका. इसके करीब चार महीने बाद एक और बड़ी वारदात हुई.

घर में घुसकर काला की हत्या

3 जनवरी 2017 को सत्येंद्र उर्फ काला की उसके घर में घुसकर हत्या कर दी गई. हमलावरों ने उस पर गोलियां बरसाईं. पुलिस ने इस हत्या का आरोप प्रदीप कासनी पर लगाया. वारदात के बाद हरियाणा पुलिस ने प्रदीप कासनी को राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया और वह लंबे समय तक अलग-अलग जेलों में बंद रहा.

काला की हत्या के बाद भी गैंगवार खत्म नहीं हुई. उल्टा दोनों पक्षों के बीच दुश्मनी और गहरी होती चली गई.

2021 में काला के भाई की हत्या

पुलिस के मुताबिक जून 2021 में काला के छोटे भाई और साहुवास गांव के सरपंच संदीप की भी हत्या कर दी गई. वारदात कपूरी मंदिर में हुई, जहां उसे ताबड़तोड़ गोलियां मारी गईं. इस हत्या की साजिश का आरोप भी प्रदीप कासनी गैंग पर लगा. काला की मौत के बाद उसके गैंग की कमान उसके भाई और करीबी साथियों के हाथों में चली गई थी. पंकज और नवदीप जैसे नाम भी इसी दौरान सामने आए.

अब यह लड़ाई केवल प्रदीप और काला तक सीमित नहीं थी. दोनों तरफ नए लोग जुड़ चुके थे और गैंग का दायरा भी बढ़ गया था.

हर हत्या के बाद हुआ पलटवार

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस गैंगवार का सबसे खतरनाक पहलू यही रहा कि हर हत्या का जवाब दूसरी हत्या से देने की कोशिश हुई. एक पक्ष का आदमी मारा जाता तो दूसरा पक्ष बदला लेने की तैयारी में जुट जाता.

इसी वजह से कई साल तक चरखी दादरी, भिवानी और झज्जर में दोनों गैंगों को लेकर तनाव बना रहा. हत्या, हत्या की कोशिश, रंगदारी और अवैध हथियार रखने जैसे कई मुकदमे दोनों पक्षों से जुड़े लोगों पर दर्ज किए गए.

कई मौकों पर बदमाशों ने सार्वजनिक जगहों पर भी फायरिंग की. इससे आम लोगों के बीच भी डर बना रहा.

कोर्ट ले जाते समय कासनी को मारने की साजिश

अक्टूबर 2022 में हरियाणा पुलिस ने एक और बड़ी साजिश का खुलासा किया था. पुलिस का दावा था कि प्रदीप कासनी को भोंडसी जेल से कोर्ट में पेशी के लिए लाए जाने के दौरान उसकी हत्या की तैयारी की गई थी.

झज्जर पुलिस ने इस मामले में शिवकांत, मंदीप और सुभाष नाम के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था. इनके पास से अवैध हथियार और कारतूस भी बरामद हुए थे.

पूछताछ में पुलिस को पता चला कि हमलावरों की योजना रास्ते में पुलिस एस्कॉर्ट पर हमला करने या कोर्ट के बाहर प्रदीप कासनी को निशाना बनाने की थी.

दिल्ली से राजस्थान तक जुड़े गैंग के तार

जांच एजेंसियों के मुताबिक दोनों गैंगों का नेटवर्क केवल चरखी दादरी तक सीमित नहीं रहा. इनके लोगों के संपर्क दिल्ली, गुरुग्राम, झज्जर, रोहतक, भिवानी और राजस्थान तक मिले हैं.

दिल्ली पुलिस भी कई बार प्रदीप कासनी गैंग से जुड़े बदमाशों को गिरफ्तार कर चुकी है. एक कार्रवाई में बड़ी संख्या में पिस्टल, देसी कट्टे और 150 से ज्यादा कारतूस बरामद किए गए थे.

पुलिस का दावा था कि इन हथियारों को विरोधी गैंग पर हमला करने के लिए जुटाया गया था.

जेल के बाद भी नहीं टूटा नेटवर्क

प्रदीप कासनी लंबे समय तक जेल में रहा, लेकिन पुलिस की मानें तो उसका गैंग पूरी तरह खत्म नहीं हुआ. बाहर मौजूद उसके साथी नेटवर्क संभालते रहे. दूसरी तरफ काला गैंग के लोग भी सक्रिय बने रहे.

पुलिस को कई बार यह जानकारी मिली कि दोनों तरफ के लोग एक-दूसरे की रेकी कर रहे हैं. मौका मिलते ही हमला करने की तैयारी की जाती थी.

जांच में यह भी सामने आया कि इन गैंगों की गतिविधियां केवल हत्या तक सीमित नहीं थीं. रंगदारी वसूलने, हथियार जुटाने और नए युवकों को गैंग में शामिल करने जैसे आरोप भी इनके सदस्यों पर लगते रहे हैं.

अब फिर करीब 30 राउंड फायरिंग

ताजा मामले में तीन हमलावर पैदल आए और चरखी दादरी शहर थाना के बाहर खड़ी स्कॉर्पियो पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं. बताया जा रहा है कि करीब 30 राउंड फायर किए गए. हमले में सात लोग घायल हो गए. इनमें दो की हालत गंभीर है. इतनी भारी फायरिंग शहर थाना के पास होना अपने आप में पुलिस व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है.

वारदात के बाद सोशल मीडिया पर रोहित गोदारा गैंग के नाम से हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा भी सामने आया. हालांकि पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में रोहित गोदारा गैंग की भूमिका सामने नहीं आई है. पुलिस फिलहाल इसे काला गैंग से जुड़ा मामला मानकर जांच कर रही है. शूटरों की पहचान, उन्हें हथियार किसने उपलब्ध कराए और हमले की पूरी साजिश कहां तैयार हुई, इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं.

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करीब 15 साल पहले शुरू हुई यह दुश्मनी अब तक कई लोगों की जान ले चुकी है. ताजा फायरिंग ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कासनी-काला गैंग की पुरानी रंजिश पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.

-भारत एक्सप्रेस



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