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CJP लीडर और ध्रुव राठी की हुई रिहाई: बाहर आते ही तेवर और सख्त, क्या जंतर-मंतर पहुंचेंगे?

CJP नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रंका और यूट्यूबर ध्रुव राठी की रिहाई के बाद दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है.

CJP Leaders

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी सुधारों की मांग को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले दिल्ली में चल रहा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. शनिवार को पुलिस की कार्रवाई और हजारों लोगों की हिरासत के बाद, रविवार को इस मामले में एक नया मोड़ आ गया है.

दरअसल कोर्ट के आदेश के बाद CJP के मुख्य नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रंका और चर्चित यूट्यूबर ध्रुव राठी को पुलिस कस्टडी से रिहा कर दिया गया है. इसके बाद से सियासी गलियारों में यह सवाल सबसे बड़ा बन गया है कि क्या ये सभी अब जंतर-मंतर की ओर कूच करेंगे?

हिरासत से बाहर आते ही तेवर और सख्त

जैसे ही कोर्ट के आदेश पर अभिजीत दीपके और अन्य नेताओं की रिहाई हुई, CJP खेमे में फिर से ऊर्जा दौड़ गई है. संगठन की कमान संभाल रहे अजिंक्य शिंदे और रिहा हुए नेताओं ने साफ कर दिया है कि पुलिस की दमनकारी कार्रवाई और बैरिकेडिंग से युवा डरने वाले नहीं हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा और जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह राजनीतिक संघर्ष थमेगा नहीं.

ध्रुव राठी की भी हुई रिहाई

इस पूरे घटनाक्रम के बीच चर्चित यूट्यूबर ध्रुव राठी की हिरासत और फिर रिहाई ने इस आंदोलन को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर और ज्यादा भड़का दिया है. सरकार और व्यवस्था के खिलाफ मुखर रहने वाले ध्रुव राठी के मैदान में आने से यह प्रदर्शन अब केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ऑनलाइन स्पेस में भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. युवाओं के बीच इनकी रिहाई को एक बड़े ‘मोमेंटम’ के रूप में देखा जा रहा है.

छावनी में तब्दील दिल्ली

प्रदर्शनकारियों के तेवर देख दिल्ली पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है. राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं:

जंतर-मंतर और आसपास के पूरे इलाके को छावनी में बदलकर सील कर दिया गया है.

दिल्ली की सीमाओं (हरियाणा और यूपी बॉर्डर) पर भारी बैरिकेडिंग कर दी गई है ताकि भारी संख्या में बाहरी हुड़दंगियों या छात्रों को अंदर न घुसने दिया जाए.

सुरक्षा के मद्देनजर राजधानी के 30 से ज्यादा प्रमुख स्थानों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है ताकि आम जनता को कम से कम परेशानी हो, लेकिन राजनीतिक हलचल पर पैनी नजर रखी जा रही है.

क्या जंतर-मंतर पहुंचेंगे नेता?

सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या रिहा होने के बाद ये नेता सीधे जंतर-मंतर की तरफ कूच करेंगे या पुलिस इन्हें दोबारा रोकने के लिए कड़े कदम उठाएगी. सुप्रीम कोर्ट में भी इस पूरे प्रशासनिक एक्शन और अधिकारों के हनन से जुड़ी याचिकाओं पर निगाहें टिकी हुई हैं. कुल मिलाकर, रविवार का यह दिन दिल्ली की सड़कों पर किसी बड़े राजनीतिक संघर्ष या टकराव का गवाह बन सकता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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