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‘महंगाई पर झूठी अफवाहें न फैलाएं खड़गे’, मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कांग्रेस पर करारा वार; गिनाए मोदी सरकार के काम

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मोदी सरकार की कल्‍याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं पर करारा हमला बोला. जानिए उन्होंने आज क्या कुछ कहा.

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे

Hardeep Singh Puri : देश के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आज कांग्रेस पार्टी को निशाने पर लेते हुए अपनी सरकार की कल्‍याणकारी योजनाओं का जिक्र किया. उन्‍होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन ‘विकसित भारत’ के बारे में बताया. साथ ही पीएम मोदी के नेतृत्व में देश को मिली उल्लेखनीय उपलब्धियों को लेकर भी कांग्रेस नेताओं पर तंज कसा.

हरदीप सिंह ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म X.com पर एक के बाद एक कई ट्वीट किए; जिनमें उन्‍होंने कांग्रेस अध्‍यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम ले-लेकर कांग्रेस की कमियां गिनाईं और भाजपा की नीतियों, योजनाओं की प्रशंसा की.

सिंह ने एक ट्वीट में कहा, “झूठ, मनगढ़ंत आंकड़ों और फर्जी डेटा पर आधारित सोशल मीडिया नीति का कांग्रेस पार्टी का क्लासिक शूट एंड स्कूट ब्रांड फिर से सक्रिय हो गया है. यहां तक ​​कि उनके वरिष्ठतम नेता भी अपनी भ्रामक राय सार्वजनिक करने से पहले तथ्यों की जांच नहीं करते हैं.”

‘भारत में रोजगार के अवसरों में हुई वृद्धि’

हरदीप सिंह ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में, भारत ने पिछले कुछ वर्षों में रोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है. 2016-17 और 2022-23 के बीच लगभग 170 मिलियन नौकरियों को जोड़ते हुए रोजगार में लगभग 36% की वृद्धि हुई है.

Hardeep puri

उन्‍होंने कहा, “मैं कांग्रेसियों को यह भी याद दिलाना चाहता हूं कि भारत की आर्थिक प्रगति प्रमुख क्षेत्रों में निरंतर रोजगार सृजन को दर्शाती है. हम बहुत जल्द दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर हैं, जबकि उनके प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और नीतियां 2014 में 11वें स्थान पर थीं.”

“हमारे युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्रदान करते हुए भारत की जीडीपी इसी अवधि के दौरान औसतन 6.5% से अधिक की दर से बढ़ी.”

“भारतीय श्रम बाजार संकेतक बताते हैं कि 2022-23 में बेरोजगारी दर घटकर 3.2% रह गई है.”

“कृषि क्षेत्र अभी भी प्रमुख बना हुआ है, जिसमें 45% से अधिक कार्यबल कार्यरत हैं, तथा विनिर्माण और सेवाओं की ओर धीरे-धीरे बदलाव हो रहा है.”

“पीएलएफएस के अनुसार, युवा (आयु 15-29 वर्ष) बेरोजगारी दर 2017-18 में 17.8% से घटकर 2022-23 में 10% हो गई है.”

“ईपीएफओ 2024 में 131.5 लाख तक पहुंच गया है, जबकि गिग इकॉनमी कार्यबल 2029-30 तक बढ़कर 2.35 करोड़ हो जाने की उम्मीद है.”

“जबकि खड़गे को ‘भगदड़’ दिखाई दे रही है, वे इस बात से अनजान हैं कि 2017-2023 के बीच श्रमिक जनसंख्या अनुपात में लगभग 26% की वृद्धि हुई है. वे स्पष्ट रूप से सभी गलत जगहों पर देख रहे हैं और नकली डेटा प्राप्त कर रहे हैं, या शायद वे अपनी पार्टी को एकजुट रखने की कोशिश में बहुत व्यस्त हैं और अपने सलाहकारों द्वारा बेचे जाने वाले झूठ को खरीद रहे हैं; या फिर वे अपनी पार्टी के घुमंतू शहजादों की ‘बेरोजगारी’ को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित हैं.”

‘कांग्रेस शासन में PM को कुछ पता नहीं होता था’

मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आगे कहा, “जहां तक ​​पेपर लीक की समस्या का सवाल है, तो ऐसा लगता है कि कांग्रेस, जिसके प्रधानमंत्री को कभी किसी बात की जानकारी नहीं होती थी, अब उसके अध्यक्ष को भी सत्ताधारी तिकड़ी द्वारा उतनी ही अनभिज्ञ रखा जाता है.”

“उन्हें पता होना चाहिए कि सत्ता में लंबे समय तक रहने के दौरान उनकी पार्टी ने जिन घोटालों का आविष्कार किया, उनमें पेपर लीक की घटना भी शामिल थी.”

“कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान कम से कम दस बड़े पेपर लीक हुए (अनगिनत छोटे मामलों का तो जिक्र ही नहीं).”

“क्या खड़गे ने 2007 में एआईईईई पेपर लीक के बारे में नहीं सुना? या 2008 में पीएमटी, 2012 में एम्स, 2014 में सीबीएसई कक्षा दसवीं और बारहवीं तथा कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र और हरियाणा में पेपर लीक के बारे में नहीं सुना?”

“क्या वे जानबूझकर कांग्रेस पार्टी की पेपर लीक की सड़ी हुई विरासत को नजरअंदाज करके देश की जनता को गुमराह कर रहे हैं?”

“सरकार के उच्च पूंजीगत व्यय और बेहतर पूंजी प्रबंधन के कारण बैंकों और बीमा कंपनियों सहित 81 सूचीबद्ध सार्वजनिक उपक्रमों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण पिछले तीन वर्षों में 225% बढ़ा है. सार्वजनिक उपक्रमों के लाभांश में वृद्धि हुई है. गैर-कर राजस्व जुटाया जा रहा है.”

हरदीप सिंह ने एक और ट्वीट में लिखा, “खड़गे को वस्तुओं और कमोडिटी की कीमतों पर झूठी अफवाहें फैलाना बंद कर देना चाहिए. उन्हें यह जानकर निराशा होगी कि भारत की मुद्रास्फीति दर 2023 में वैश्विक औसत से 1.4 प्रतिशत कम थी. वित्त वर्ष 2024 में मुख्य सेवाओं की मुद्रास्फीति 9 साल के निचले स्तर पर है. आरबीआई को वित्त वर्ष 2025 में 4.5% और वित्त वर्ष 2026 में 4.1% मुद्रास्फीति की उम्मीद है.”

‘गरीबी हटाओ का खोखला नारा लगाती थीं कांग्रेस सरकारें’

उन्होंने X.com पर लिखा, “कांग्रेस की सरकारें ‘गरीबी हटाओ’ को एक खोखले नारे के रूप में इस्तेमाल करती थीं, मोदी सरकार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत 11.8 लाख करोड़ रुपये की लागत से 1 जनवरी, 2024 से शुरू होने वाले पांच वर्षों के लिए लगभग 81.35 करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध करा रही है. कांग्रेस आवश्यक खाद्य वस्तुओं पर जीएसटी को लेकर झूठ बोल रही है.”

“वे यह नहीं जानते कि दालें, चावल, आटा आदि जैसी निर्दिष्ट वस्तुएँ, जब खुले रूप में बेची जाती हैं, तो उन्हें जीएसटी से पूरी तरह छूट दी जाती है और पैकेज्ड और लेबल वाले रूप में केवल 5% की रियायती जीएसटी लगती है. मैं एक बार फिर खड़गे से अनुरोध करूंगा कि वे परिवार के वंशज को बेरोजगारी के मानदंड के रूप में और अपनी पार्टी के खजाने को औसत भारतीयों की घटती बचत के संकेतक के रूप में देखना बंद करें.”

“सच्चाई यह है कि महामारी के बाद घरेलू क्षेत्र की समग्र बचत की संरचना में बदलाव आया है. कुल बचत में वित्तीय बचत की हिस्सेदारी भले ही 2019-20 में 40.3% से घटकर 2022-23 में 28.5% हो गई हो, लेकिन इसी अवधि में भौतिक बचत की हिस्सेदारी 59.7% से बढ़कर 71.5% हो गई है. पिछले दशक में, परिवारों ने सकल वित्तीय बचत की अपनी होल्डिंग्स में भी विविधता लाई है. प्रोविडेंट और पेंशन फंड में रखी गई घरेलू बचत की हिस्सेदारी 2011-12 में 10% से बढ़कर 2022-23 में 21% हो गई है. 2011-12 और 22-23 के बीच देश भर में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में असमानता कम हुई है.”

हरदीप सिंह ने कहा, “खड़गे की पार्टी ‘खाना-कमाना’ में इतनी मशगूल है कि अपने शासन के दौरान उसने कई घोटाले किए, जिससे आगे देखने की उसकी क्षमता खत्म हो गई है. यह भूलने की बीमारी से ग्रस्त है. यह भूल जाती है कि नीरव मोदी प्रकरण का मूल पाप 2011 में उसके शासन में हुआ था.”

“यूपीए शासन के दौरान अडानी समूह को 72,000 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया था.”

“यूपीए शासन के दौरान अंबानी समूह को 1,13,000 करोड़ रुपये का ऋण मिला था.”

“2012 में 1,457 करोड़ रुपये का ऋण न चुकाने के बावजूद विजय माल्या के समूह को 1,500 करोड़ रुपये का ऋण और दे दिया गया.”

“2005 से 2013 तक यूपीए सरकारों ने बड़े उद्योगपतियों के 36.5 लाख करोड़ रुपये के कर्ज माफ किए.”

“2005-06 की तुलना में 2012-13 में खराब कर्ज की दर में 132% की वृद्धि हुई.”

हरदीप सिंह ने कहा, “‘न खाऊंगा न खाने दूंगा’ के आदर्श वाक्य से प्रेरित होकर मोदी सरकार ने लोगों का पैसा वसूलना शुरू किया, भगोड़े आर्थिक अपराधियों माल्या, मोदी और चोकसी की संपत्तियों की बिक्री से 22,500 करोड़ रुपये में से 13,109 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं.”

पीएम मोदी के नेतृत्व में मोदी सरकार ने बैंकिंग क्षेत्र को बदल दिया – 10 वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक खराब कर्ज वसूल किए गए.

कुछ ऐसा जो कांग्रेस और यूपीए ने नहीं किया क्योंकि ऐसा उनका कभी इरादा नहीं था.

हरदीप सिंह ने कहा, “कांग्रेस को विदेशी धरती की ओर देखना और प्रचारित किए जा रहे प्रेरित सूचकांकों पर विश्वास करना बंद कर देना चाहिए.”

“प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दुनिया भारत की ओर आशा और विश्वास के साथ देख रही है, राय और सलाह के लिए.”

“खड़गे जिस भूख सूचकांक को अंतिम शब्द मान रहे हैं, वह बहुत ही दोषपूर्ण है. यदि वे उनसे बात कर रहे हैं, तो उन्हें अपनी पार्टी के लोगों से सलाह लेनी चाहिए या अंतरराष्ट्रीय संगठनों के काम करने के तरीके के बारे में कुछ जानकारी होनी चाहिए.”

“उन्होंने उन्हें ऐसे सूचकांक पर विश्वास न करने के लिए शिक्षित किया होगा, जिसमें भारत, जो अपने 81 करोड़ से अधिक लोगों को सूखा राशन वितरित कर रहा है, को 105वें स्थान (2024) पर रखा गया है, जबकि आंतरिक कलह से त्रस्त पाकिस्तान जैसे देश को 109वें स्थान पर रखा गया है.”

“2014-24 के बीच कुल एफडीआई प्रवाह 700 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि 2004-2014 के बीच यह केवल 304 बिलियन अमेरिकी डॉलर था.”

क्या यह ऐसे देश का संकेत है, जिसके लोग भूखे हैं और उनकी देखभाल नहीं की जाती?

साथ ही, चूंकि उन्होंने यह मुद्दा उठाया है, खड़गे, जिन्हें आखिरी बार उस कमरे में झांकते देखा गया था, जहां सत्तारूढ़ तिकड़ी आराम से बैठी थी, उन्हें यह पता होना चाहिए कि यूपीए हमारी सीमाओं पर घात लगाकर किए गए हमलों और घुसपैठ को नियंत्रित करने में पूरी तरह से ढीली थी.

हरदीप सिंह ने कहा, “कांग्रेस पार्टी और खड़गे उन बदलावों से बेखबर हैं, जिन्होंने भारतीयों के जीवन को बेहतर बनाया है.”

पीएम मोदी के मार्गदर्शन में ‘सबका साथ, सबका विकास’ के दृष्टिकोण पर आधारित समावेशी विकास की नीतियों ने 24 करोड़ से अधिक भारतीयों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला है.

योजना और नीतियां, जिनमें ये भी देखा गया-

  • स्वच्छ भारत मिशन के तहत 11 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण.
  • जल जीवन मिशन और अमृत के तहत 12 करोड़ नल जल कनेक्शन.
  • बेहतर स्वास्थ्य परिणामों के कारण भारतीय परिवार सालाना लगभग ₹60,000 की बचत करते हैं.
  • एलपीजी कवरेज, 2014 में मात्र 55.9% कवरेज से.
  • 10 करोड़ से अधिक उज्ज्वला कनेक्शन.

“हमने यह सुनिश्चित किया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें तब भी न बढ़ें, जब अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए-2 सरकार की तुलना में 40-70% की वृद्धि हुई थी, जब 1.41 लाख करोड़ रुपये के तेल बांड जारी करने की उनकी मूर्खता के कारण देश को बदले में 3.2 लाख करोड़ रुपये चुकाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.”

  • आयुष्मान भारत मिशन के माध्यम से पिछले 10 वर्षों में स्वास्थ्य पर जेब से होने वाले खर्च में 25% की कमी आई है. 2014 से अब तक 25 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला गया है.
  • पीएम आवास योजना के तहत 4 करोड़ घरों का निर्माण किया जाएगा, मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के लिए 3 करोड़ और घरों की घोषणा की गई है.
  • 51 करोड़ जनधन खाते खोले गए हैं. JAM ट्रिनिटी (जनधन, आधार, मोबाइल) के माध्यम से लोगों के बैंक खातों में सीधे 34 लाख करोड़ रुपये से अधिक स्थानांतरित किए गए हैं.
  • पूंजीगत व्यय 2013-14 से लगभग तीन गुना बढ़ गया है, जो 2013-14 में 3.92 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 11.1 करोड़ रुपये हो गया है.

“जीएसटी, आईबीसी, परिसंपत्ति मुद्रीकरण, श्रम कानून सुधार, स्टार्ट-अप इंडिया और पीएलआई योजना जैसे नीतिगत सुधारों ने भारत की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित किया है और नवाचार को बढ़ावा दिया है.

“अब भारत यह प्रदर्शित कर रहा है कि वह 2047 तक अपने विकास लक्ष्यों को प्राप्त कर लेगा और विकसित भारत बनेगा.”

– भारत एक्‍सप्रेस



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