कांग्रेस पार्टी फिर एक बार नई चुनौती से घिरी हुई है. कर्नाटक में चल रहे है मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर CM सिद्धारमैया (Siddaramaiah) और डिप्टी CM डी.के. शिवकुमार (DK Shivkumar) की आपसी मतभेद में कांग्रस की छवि धूमिल हो रही है. अब इसके साथ एक नया विवाध चर्चा में आ गया है, जब कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद अहमद पटेल (Ahmed Patel) के बेटे ने बिहार की हार का ठिकरा गांधी परिवार पर फोड़ा दिया है. जिसके बाद फैसल अहमद पटेल (Faisal Patel) ने कांग्रेस पार्टी का एक नया विंग बनाने की बात कही है.
हार के लिए गांधी परिवार जिम्मेदार
हाली में हुए बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Vidhan Sabha Election 2025) में कांग्रेस को 243 सीटों में से मात्र 6 सीटें मिलीं, जिसके बाद से कांग्रेस हाईकमान इस हार का कारण ढूंढने के लिए मीटिंग पर मीटिंग कर रहा है. इस सबके बीच कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद अहमद पटेल के बेटे का बयान काफी चर्चा में है. फैसल पटेल ने बिहार की हार के लिए गांधी परिवार को जिम्मेदार बताया है. उन्होंने कहा, “हारे हुए गांधी परिवार अयोग्य है और उन्हें किनारे हो जाना चाहिए”. उन्होंने आगे कहा कि वह चाहते हैं कि गांधी परिवार पीछे हट जाए क्योंकि वे विपक्ष के हित और लोकतंत्र के साथ अन्याय कर रहे हैं, जिसे एक विकल्प की आवश्यकता है.
कांग्रेस का विभाजन ?
बिहार चुनाव के नतीजे आने के बाद फैसल पटेल ने कांग्रेस को दो भाग में बांटने की बात कही है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर कांग्रेस से अलग हो कर एक नए ग्रुप की शुरूआत करने की बात कही है, जिससे राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी तेज हो गई है. फैसल ने अपनी बहन के साथ आने का दावा भी किया है.
फैसल की सोशल मीडिया पोस्ट का स्क्रीनशॉर्ट तेज से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने लिखा, ‘वे कांग्रेस पार्टी को तोड़कर एक नया ग्रुप बनाने की सोच रहे हैं, जिसका नाम ‘कांग्रेस (AP)’ रखा जाएगा.’

1969 के जैसा हाल होगा…
1967 के पांचवें लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को पहली बार कड़ी चुनौती मिली. कांग्रेस 520 में 283 सीटें जीत पाई. यह उसका अब तक सबसे खराब प्रदर्शन था. इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) प्रधानमंत्री तो बनीं लेकिन कांग्रेस में अंर्तकलह शुरू हो गई. आखिरकार 1969 में कांग्रेस टूट गई. मूल कांग्रेस की अगुवाई कामराज और मोरारजी देसाई कर रहे थे और इंदिरा गांधी ने कांग्रेस (आर) के नाम से नई पार्टी बनाई. हालांकि ज्यादातर सांसदों का समर्थन इंदिरा गांधी के साथ था, इसलिए इंदिरा गांधी सरकार में भी बनी रहीं.
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कांग्रेस को लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा होती रहती है, और जब से कांग्रेस को राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का नेतृत्व मिला है, तब से कांग्रेस राजनीतिक विरोधियों, राजनीतिक पंडितों और पॉलिटिकल एडवाइजरों की नजरों में बनी हुई है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कर्नाटक की कलह और फैसल पटेल के विरोध को कांग्रेस कैसे संभालेगी या फिर कांग्रेस दो भाग में बंट जाएगी.
-भारत एक्सप्रेस
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