मोकामा प्रखंड में किसानों को सरकारी योजना के तहत दिए जाने वाले बीज वितरण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार (Corruption) का मामला सामने आया है. स्थानीय किसानों ने निजी एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार की ओर से बीज वितरण की जिम्मेदारी जिस एजेंसी को सौंपी गई है, वही एजेंसी बीज को किसानों तक पहुंचाने के बजाय खुले बाजार में बेच रही है. इस खुलासे के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल बन गया है.
स्टॉक कहीं और भेजने पर गुस्साए किसान
जानकारी के अनुसार, मोकामा प्रखंड के कई पंचायतों से किसान प्रखंड मुख्यालय पर बीज लेने के लिए पहुंचे थे. किसानों का कहना है कि उन्हें पहले से सूचना दी गई थी कि निर्धारित तिथि पर बीज का वितरण किया जाएगा. लेकिन जब वे प्रखंड कार्यालय पहुंचे, तो वहां उन्हें बताया गया कि बीज का स्टॉक खत्म हो चुका है. इससे नाराज किसानों ने जब इसकी वजह जानने की कोशिश की, तो उन्हें पता चला कि बीज को ट्रैक्टर पर लादकर कहीं और भेज दिया गया है.
इस घटना के बाद मौके पर ही किसानों ने विरोध शुरू कर दिया. प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष किसान शामिल थे. किसानों का आरोप है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि लंबे समय से बीज वितरण में गड़बड़ी की जा रही है. उनका कहना है कि एजेंसी जानबूझकर किसानों को बीज नहीं देती और बाद में उसी बीज को निजी तौर पर बेचकर मुनाफा कमाती है. इससे किसानों को समय पर बीज नहीं मिल पाता और उनकी खेती प्रभावित होती है.
अनियमित बिक्री की शिकायतें
किसानों के आरोपों की पुष्टि किसान सलाहकार पवन कुमार ने भी की है. उन्होंने बताया कि जब किसान बीज लेने के लिए आते हैं, तो उन्हें अक्सर खाली हाथ लौटना पड़ता है. पवन कुमार का कहना है कि एजेंसी द्वारा बीज की अनियमित बिक्री की शिकायतें पहले भी सामने आई हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
इस मामले के उजागर होने के बाद किसानों ने प्रशासन से तत्काल जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है. किसानों का कहना है कि यदि समय पर बीज नहीं मिला तो फसल की बुवाई प्रभावित होगी, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा. वहीं, प्रशासनिक स्तर पर अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन किसानों को उम्मीद है कि जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी और उन्हें न्याय मिलेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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