अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण, प्रबंधन और उसकी सुरक्षा का पूरा जिम्मा ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ पर है. सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद साल 2020 में मोदी सरकार द्वारा इस स्वायत्त और स्वतंत्र ट्रस्ट का गठन किया गया था. इस पूरे ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य शामिल हैं, जिनमें से 12 सदस्यों को सीधे सरकार द्वारा नियुक्त किया गया था और बाकी तीन सदस्यों को पहली बैठक में चुना गया था. इस ट्रस्ट को अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेने की पूरी पावर है और इसके आंतरिक मामलों या वित्तीय फैसलों में उत्तर प्रदेश सरकार का सीधा दखल नहीं होता है.
सबसे बड़ी जिम्मेदारियां इन पदाधिकारियों के पास
ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में मुख्य रूप से तीन से चार लोगों के पास सबसे महत्वपूर्ण पावर होती है.
- महंत नृत्य गोपाल दास (अध्यक्ष): यह ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं. ट्रस्ट के सभी बड़े नीतिगत फैसले, संतों के मार्गदर्शन और धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़े फैसले इनके नेतृत्व में लिए जाते हैं.
- चंपत राय (महासचिव): चंपत राय ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की तरह दिन-प्रतिदिन का प्रशासनिक कार्य, भूमि संबंधी मामले और सार्वजनिक संचार संभालते रहे. चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद भारी विरोध हुआ तो उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.
- स्वामी गोविंद देव गिरी (कोषाध्यक्ष): ट्रस्ट के सारे वित्तीय लेनदेन, दान में मिलने वाली रकम का हिसाब-किताब और बैंक खातों के प्रबंधन की मुख्य पावर इन्हीं के पास है.
- नृपेंद्र मिश्र (निर्माण समिति के अध्यक्ष): प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र मंदिर निर्माण समिति के प्रमुख हैं. मंदिर के इंजीनियरिंग, डिजाइनिंग और निर्माण कार्य की पूरी देखरेख इन्हीं के जिम्मे है.
ट्रस्ट के स्थायी सदस्य और वोटिंग अधिकार
इस 15 सदस्यीय बोर्ड में सभी लोगों को वोटिंग का अधिकार नहीं होता है. कुल 11 सदस्यों के पास ही ट्रस्ट के प्रस्तावों पर वोट देने की पावर होती है. इसमें देश के जाने-माने वकील के. परासरन संस्थापक सदस्य और कानूनी सलाहकार के रूप में जुड़े हैं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में रामलला का पक्ष मजबूती से रखा था. उनके अलावा देश के अलग-अलग कोनों से चार धार्मिक गुरु, निर्मोही अखाड़ा के एक प्रतिनिधि, अयोध्या राजपरिवार के बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र, एक दलित प्रतिनिधि और दो स्थानीय नागरिक इसमें शामिल हैं.
सरकार की भूमिका और ऑडिट व्यवस्था
ट्रस्ट में उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर आईएएस स्तर के अधिकारी और अयोध्या के जिला मजिस्ट्रेट (DM) पदेन सदस्य (Ex-Officio) के रूप में शामिल होते हैं. हालांकि, इन सरकारी अधिकारियों को ट्रस्ट की वित्तीय या प्रशासनिक बैठकों में वोट देने का अधिकार नहीं होता है. सरकार की भूमिका सिर्फ सुरक्षा, कानून व्यवस्था और भारी भीड़ के समन्वय तक ही सीमित है. राम मंदिर को मिलने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे और दान का पूरा हिसाब-किताब रखने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CA) द्वारा स्वतंत्र रूप से वैधानिक ऑडिट (Statutory Audit) कराया जाता है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे.
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-भारत एक्सप्रेस
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