दिल्ली की सियासत में लंबे समय से छाया आबकारी नीति मामला एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है. राजधानी की राऊज एवेन्यू अदालत ने आज (शुक्रवार) को आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और उनके करीबी सहयोगी मनीष सिसोदिया को इस केस में 23 अन्य आरोपियों के साथ बरी कर दिया. यही मामला पिछले दो साल से शराब नीति घोटाला नाम से सुर्खियों में था.
इस केस के चलते केजरीवाल और सिसोदिया दोनों को महीनों जेल में रहना पड़ा. अब अदालत से राहत मिलने के बाद आम आदमी पार्टी और इंडिया गठबंधन ने खुलकर कहा है कि केंद्र सरकार ने राजनीतिक फायदे के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया. खुद केजरीवाल का आरोप रहा है कि दिल्ली में सरकार बनाने की कोशिशों के तहत उन्हें फंसाया गया.
आखिर क्या था पूरा विवाद?
इस कहानी की शुरुआत नवंबर 2021 में हुई थी, जब दिल्ली सरकार एक नई आबकारी नीति (Excise Policy) लेकर आई थी. सरकार का दावा था कि इससे शराब के काले बाजार पर लगाम लगेगी, ग्राहकों का अनुभव बेहतर होगा और सरकारी खजाने में ज्यादा पैसा आएगा. लेकिन पासा उल्टा पड़ गया.
बीजेपी ने आरोप लगाया कि इस नीति के बहाने शराब माफियाओं को फायदा पहुंचाया गया और भ्रष्टाचार के जरिए पार्टी का फंड भरा गया. यह विवाद इतना बढ़ा कि 2022 में दिल्ली सरकार को अपनी ही यह नीति वापस लेनी पड़ी. जुलाई 2022 में तत्कालीन मुख्य सचिव नरेश कुमार ने उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को एक रिपोर्ट सौंपी. इसमें नीति बनाने और लागू करने में कथित प्रक्रियात्मक खामियों का जिक्र था. इसमें दावा किया गया कि इससे सरकारी खजाने को 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है.
एलजी की सिफारिश के बाद CBI जांच हुआ शुरू
रिपोर्ट के आधार पर उपराज्यपाल ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच की सिफारिश की. जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि नीति में बदलाव कर कुछ थोक विक्रेताओं को फायदा पहुंचाया गया. साथ ही यह भी दावा किया गया कि शराब कंपनियों से करीब 100 करोड़ रुपये की रिश्वत ली गई, जिसका इस्तेमाल गोवा और पंजाब चुनावों में किया गया था.
बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में कार्रवाई की. 21 मार्च 2024 को ईडी ने केजरीवाल को गिरफ्तार किया, और फिर 26 जून 2024 को CBI ने भी उन्हें हिरासत में ले लिया.
जब चार्जशीट दाखिल हुई तो केजरीवाल को कथित मुख्य साजिशकर्ता बताया गया. सिसोदिया पर भी मनमाने फैसले लेकर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के आरोप लगे. दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी लगातार कहती रही कि ये कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से की जा रही है. अब अदालत के फैसले ने इस पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया है. जहां आप (आम आदमी पार्टी) इसे सच्चाई की जीत बता रही है, वहीं भाजपा अब भी अपने आरोपों पर कायम है.
ये भी पढ़ें- पीएम मोदी का 1 मार्च को तमिलनाडु दौरा, 7000 करोड़ रुपए से ज्यादा के प्रोजेक्ट करेंगे लॉन्च
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

