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दिल्ली उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक पार्कों के रखरखाव में विफल रहने पर डीडीए को लगाई फटकार

अदालत नई दिल्ली नेचर सोसाइटी द्वारा स्थानांतरण पर रोक लगाने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि हिरणों को अधिकारियों द्वारा बिना किसी पूर्व स्वास्थ्य जांच के जानवरों के स्वास्थ्य, उम्र और शारीरिक स्थिति के बारे में विवेक का प्रयोग किए ट्रकों में लोड किया जा रहा था।

Delhi High Court
Prakhar Rai Edited by Prakhar Rai

दिल्ली हाई कोर्ट ने डीडीए को बताया है कि उसने हौज खास के हिरण पार्क में करीब दो दर्जन हिरणों को रखने का फैसला किया है, बशर्ते केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) इसके मिनी चिड़ियाघर के दर्जे को नवीनीकृत करे। जून 2023 में सीजेडए की तकनीकी समिति ने पार्क को मिनी चिड़ियाघर के रूप में चलाने के लिए डीडीए के लाइसेंस को रद्द करने के बाद लगभग 600 हिरणों को स्थानांतरित करने को मंजूरी दी थी। वहीं लाइसेंस रद्द कर दिया गया क्योंकि प्राधिकरण जानवरों के अंतःप्रजनन की जाँच करने और उसके दिशा-निर्देशों का पालन करने में विफल रहा।

अंतर्राष्ट्रीय संघ (आईयूसीएन) के दिशा-निर्देशों का अनुपालन करें

स्थानांतरण को 70:30 के अनुपात में मंजूरी दी गई, बशर्ते कि अधिकारी वैधानिक प्रावधानों और प्रकृति के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ (आईयूसीएन) के दिशा-निर्देशों का अनुपालन करें। डीडीए ने हिरणों को रखने का फैसला तब लिया जब दिल्ली हाई कोर्ट ने नगर निकाय को पार्क में कम से कम 50 हिरण रखने के लिए कहा। अदालत नई दिल्ली नेचर सोसाइटी द्वारा स्थानांतरण पर रोक लगाने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि हिरणों को अधिकारियों द्वारा बिना किसी पूर्व स्वास्थ्य जांच के जानवरों के स्वास्थ्य, उम्र और शारीरिक स्थिति के बारे में विवेक का प्रयोग किए ट्रकों में लोड किया जा रहा था। अधिवक्ता अर्जुन साहनी और सिद्धार्थ वर्मा द्वारा दायर याचिका में डीडीए को यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि वह स्थानांतरण के दौरान सीजेडए और आईयूसीएन द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करे। दिशा-निर्देशों में गर्भवती मादाओं और सींग वाले नए पैदा हुए हिरणों के स्थानांतरण पर रोक है।

सुनवाई के दौरान डीडीए के वकील ने अदालत के समक्ष एक हलफनामा पेश किया

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान डीडीए के वकील ने अदालत के समक्ष एक हलफनामा पेश किया, जिसमें इसके उपाध्यक्ष और उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सीजेडए से आवश्यक मंजूरी प्राप्त करने के बाद प्रसिद्ध पार्क में कुछ हिरणों को बनाए रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। हलफनामे में यह भी कहा गया है कि डीडीए आवश्यक मंजूरी के लिए सीजेडए से संपर्क करेगा और आवश्यकताओं के अनुसार अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। अदालत ने डीडीए के हलफनामे को ध्यान में रखते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।

-भारत एक्सप्रेस



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