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दिल्ली हाई कोर्ट ने कश्मीरी युवक को जमानत देने से किया इनकार, NIA ने किया था गिरफ्तार, पढ़ें क्या है पूरा मामला

एनआईए ने आरोप लगाया कि जहूर पॉल की ISIS के प्रति निष्ठा थी और वह जम्मू-कश्मीर में कुछ आतंकवादी कृत्य को अंजाम देने के लिए अपने कैडरों के लिए हथियार और गोला-बारूद खरीदने में शामिल था.

Delhi High Court

Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत गिरफ्तार किए गए 25 वर्षीय कश्मीरी युवक को नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया. कश्मीरी युवक पर प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन आईएसआईएस की विचारधारा का समर्थक होने, अवैध हथियारों की व्यवस्था करने और अन्य रसद सहायता प्रदान करने का आरोप है. उसे एनआईए ने 2018 में लाल किला की ओर जाते समय गिरफ्तार किया था. उसके पास से एनआईए ने एक पिस्टल भी बरामद की थी.

लाल किला के पास से हुआ था गिरफ्तार

एनआईए ने आरोप लगाया कि जहूर पॉल की ISIS के प्रति निष्ठा थी और वह जम्मू-कश्मीर में कुछ आतंकवादी कृत्य को अंजाम देने के लिए अपने कैडरों के लिए हथियार और गोला-बारूद खरीदने में शामिल था. जहूर पॉल को लाल किला की ओर बढ़ते पाए जाने के बाद राष्ट्रीय राजधानी में पकड़ लिया गया था. उसके पास से एक पिस्तौल बरामद हुई, जिसकी मैगजीन में पांच कारतूस थे. अभियोजन पक्ष के अनुसार जहूर पॉल और उसके साथ गिरफ्तार एक अन्य व्यक्ति ने खुलासा किया कि उन्होंने बरामद हथियार यूपी के चार लोगों से पैसे के बदले में खरीदे थे.

ISIS की विचारधारा का प्रचार कर रहा था जहूर

NIA ने यह भी आरोप लगाया गया कि जांच के दौरान दोनों ने खुलासा किया कि वे भारत में आतंकवादी आईएसआईएस की विचारधारा का प्रचार कर रहे थे और एक अन्य आईएसआईएस आतंकवादी, अब्दुल्ला बसिथ के संपर्क में थे. पीठ ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि अत्याधुनिक हथियारों की खरीद को यूं ही नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. इसमें कहा गया है कि जहूर पॉल के खुलासे से वास्तव में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं और इसलिए, ऐसे हिस्से को अस्वीकार्य नहीं कहा जा सकता है.

अदालत ने कहा अपीलकर्ता के खाते की बीबीएम डिस्पले तस्वीर में चार आतंकवादियों की छवि है, जिनमें से दो एके 47 राइफलें ले जा रहे हैं. अपीलकर्ता के बीबीएम खाते की ऐसी प्रोफ़ाइल तस्वीर से उसकी मानसिक स्थिति का पता चलता है और मामले की अजीब तथ्यात्मक मैट्रिक्स को देखते हुए, इसे लापरवाही से खारिज नहीं किया जा सकता है.

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पीठ ने कहा कि पॉल और अन्य आरोपियों ने यूपी से हथियार खरीदे थे, एक साथ दिल्ली आए थे और एक साथ कश्मीर जाने की योजना बना रहे थे. इसलिए, अदालत ने कहा कि इस प्रारंभिक मोड़ पर, यह नहीं कहा जा सकता है कि उनके बीच कोई सहमति या मौन समझ नहीं थी.

अदालत ने कहा अभियोजन पक्ष के अनुसार इन हथियारों की व्यवस्था आतंक को कायम रखने के लिए की जा रही थी और इसलिए, इस स्तर पर, व्यापक संभावनाओं पर मामले का परीक्षण करते हुए, यह दिखाने के लिए सामग्री है कि अपीलकर्ता के खिलाफ प्रथम दृष्टया सही मामला है.

-भारत एक्सप्रेस



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