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क्या संसद में पेश होने वाला है परिसीमन बिल? मानसून सत्र शुरु होने से पहले किरेन रिजिजू ने दिया जवाब

20 जुलाई को मानसून सत्र शुरू होने से पहले परिसीमन बिल चर्चा का विषय बन गया है. सवाल है कि क्या सरकार फिरसे इस संसद में पास कराने के लिए पेश करेंगी. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया फिलहाल 8 बिल सूचीबद्ध हैं.

Will Delimitation Bill Pass In Monsoon Session Kiren Rijiju Clarifies

Monsoon Session 2026: संसद का मानसून सत्र कल यानी 20 जुलाई को शुरु होने वाला है. इसी बीच परिसीमन बिल को लेकर चर्चा भी तेज हो गई है. ऐसे में ये सवाल उठना लाजमी है कि क्या इस बार बहुप्रतीक्षित परिसीमन बिल पास हो जाएगा? सत्र की शुरुआत से ठीक पहले जब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से इस बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने सरकार की रणनीति को लेकर स्थिति काफी हद तक साफ कर दी.

क्या बोले संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू?

दरअसल, इसी साल अप्रैल में बजट सत्र के दौरान यह बिल संसद में जरूरी बहुमत न मिलने के कारण गिर गया था. ऐसे में मानसून सत्र को लेकर अटकलें तेज हो गी है कि संसद में इसे फिर से पास कराने की कोशिश की जा सकती है

वहीं, जब मीडिया ने किरेन रिजिजू से पूछा कि क्या सरकार को इस सत्र में परिसीमन बिल पर सभी पार्टियों का साथ मिलने का भरोसा है, तो उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में जवाब दिया.

किरेन रिजिजू ने कहा, ‘फिलहाल हमने बुलेटिन के जरिए दोनों सदनों की कार्रवाई के लिए 8 बिलों को चिह्नित किया है. इन 8 विधेयकों के अलावा अगर सरकार कोई भी अन्य बिल सदन में लाती है, तो पहले उस पर पूरी चर्चा की जाएगी. विपक्षी दलों को पूरी सूचना देकर और उन्हें भरोसे में लेकर ही नया बिल लाया जाएगा.’ उन्होंने साफ किया कि जो बिल अभी बुलेटिन का हिस्सा नहीं है, उस पर फिलहाल आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता.

परिसीमन बिल पर क्यों है रार?

परिसीमन बिल यानी 131वां संविधान संशोधन विधेयक एक ऐसा प्रस्ताव है, जिसके जरिए देश में लोकसभा और राज्यों की विधानसभा सीटों का नए सिरे से गठन किया जाना है. इस बिल में लोकसभा सीटों की संख्या को 550 से बढ़ाकर 850 करने और साथ ही महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव है. सरकार का तर्क है कि बदलती आबादी को सही प्रतिनिधित्व देने के लिए यह जरूरी है.

वहीं, विपक्ष इसका कड़ा विरोध कर रहा है. विपक्षी दलों का आरोप है कि जनसंख्या के आधार पर सीटें बढ़ने से दक्षिण भारतीय राज्यों को भारी राजनीतिक नुकसान होगा, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में अच्छा काम किया है. बजट सत्र के दौरान इस बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे, जिससे दो-तिहाई बहुमत न होने के कारण यह पास नहीं हो सका था.

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-भारत एक्सप्रेस



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