हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPPCL) के वरिष्ठ महाप्रबंधक विमल नेगी की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु के मामले में हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग के भीतर ही मतभेद स्पष्ट रूप से सामने आए हैं. 19 मई को उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान पुलिस विभाग की ओर से दो वरिष्ठ अधिकारियों — पुलिस अधीक्षक (एसपी) शिमला संजीव गांधी तथा पुलिस महानिदेशक (DGP) अतुल वर्मा — ने अलग-अलग और परस्पर विरोधी बयान प्रस्तुत किए.
जहां एसपी गांधी द्वारा न्यायालय को यह सूचित किया गया कि “जांच पूर्ण निष्ठा एवं पारदर्शिता के साथ जारी है”, वहीं डीजीपी वर्मा ने न्यायालय के समक्ष शपथपत्र के माध्यम से कई महत्वपूर्ण और गंभीर अनुत्तरित प्रश्नों को रेखांकित किया तथा संपूर्ण जांच की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा किया.
डीजीपी द्वारा उठाए गए प्रमुख बिंदु:
1. पेन ड्राइव का प्रारूपण (फॉर्मेटिंग) – फॉरेंसिक विश्लेषण के अनुसार उक्त पेन ड्राइव 21 मार्च 2024 को फॉर्मेट की गई, जो श्री नेगी के शव की बरामदगी के 8–10 घंटे के भीतर प्राप्त हुई थी. यह स्पष्ट नहीं है कि इसकी संभावित साक्ष्यात्मक महत्ता किसे पूर्व से ज्ञात थी.
2. पेन ड्राइव बरामद करने वाले पुलिस अधिकारी से पूछताछ नहीं – सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) राजकुमार, जिन्होंने पेन ड्राइव को बरामद कर विभाग को सौंपा, उनसे पूछताछ अब तक नहीं की गई है.
3. पेन ड्राइव से डेटा पुनर्प्राप्ति का अभाव – जांच में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि पेन ड्राइव से कॉल डाटा रिकॉर्ड (सीडीआर) प्राप्त किया गया या नहीं, जबकि उसमें कई भ्रष्ट (corrupted) फाइलें पाई गईं.
4. सीसीटीएनएस प्रणाली का अद्यतन न होना – अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क प्रणाली (CCTNS) का समुचित समन्वय नहीं किया गया, जिससे निगरानी प्रक्रिया प्रभावित हुई.
5. मृतक के मोबाइल उपकरणों की देर से जब्ती – मार्च में मोबाइल उपकरण स्विच किए गए, किंतु उन्हें कई सप्ताह बाद जब्त किया गया.
6. अन्य वस्तुओं की देर से बरामदगी – मृतक की व्यक्तिगत वस्तुएँ जैसे कलम, कुछ विशिष्ट व्यक्तियों की तस्वीरें आदि क्रमशः 7 अप्रैल व 23 अप्रैल को ही जब्त की गईं.
न्यायालय की प्रतिक्रिया, CBI जांच पर विचार
न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की एकलपीठ ने डीजीपी एवं एसपी द्वारा प्रस्तुत शपथपत्रों का संज्ञान लिया तथा वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा दायर सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के पश्चात निर्णय सुरक्षित रखा है.
उल्लेखनीय है कि विमल नेगी 10 मार्च 2024 से लापता थे और उनका शव 18 मार्च को बिलासपुर जिले में पाया गया. मृतक के परिजनों एवं एचपीपीसीएल के कर्मचारियों द्वारा कुछ ठेकेदारों पर भ्रष्टाचार से संबंधित विवाद में धमकियाँ देने का आरोप लगाया गया है.
जब पुलिस विभाग के भीतर ही जांच को लेकर स्पष्ट असहमति हो, और सर्वोच्च पुलिस अधिकारी स्वयं गंभीर कमियों की ओर संकेत करें, तो यह आवश्यक हो जाता है कि जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए. ऐसे में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा जांच का मार्ग न्यायिक दृष्टि से उपयुक्त है.
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