Shyama Prasad Mukherjee death anniversary: भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी नेता और महान शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया. इस अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) समेत कई केंद्रीय मंत्रियों और नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.
नेताओं ने डॉ. मुखर्जी के राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय हितों के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया. उनका त्याग, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति आज भी करोड़ों देशवासियों को प्रेरित करती है. नेताओं ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचार और आदर्श आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बने रहेंगे.
अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट कर लिखा, “देश की एकता और अखंडता के प्रखर उपासक, जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के अग्रदूत डॉ. मुखर्जी ने जहाँ कश्मीर में ‘दो विधान, दो प्रधान और दो निशान’ का मुखर विरोध किया, वहीं बंगाल भारत का ही हिस्सा रहे, इसके लिए भी संघर्ष किया.”
अमित शाह ने आगे लिखा, “आज उनकी जन्मभूमि राष्ट्रप्रथम का संकल्प लेकर देश की सुरक्षा और अपनी विरासत की रक्षा की दिशा में आगे बढ़ रही है. कश्मीर से लेकर बंगाल तक, राष्ट्रनिर्माण के एकसूत्र में बंधकर यह देश उनके पदचिह्नों पर आगे बढ़ता रहेगा.”
देश की एकता और अखंडता के प्रखर उपासक, जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के अग्रदूत डॉ. मुखर्जी ने जहाँ कश्मीर में ‘दो विधान, दो प्रधान और दो निशान’ का मुखर विरोध किया, वहीं बंगाल भारत का ही हिस्सा रहे,… pic.twitter.com/sEeG7OdcjY— Amit Shah (@AmitShah) June 23, 2026
इन मंत्रियों ने भी दी श्रद्धांजलि
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले डॉ. मुखर्जी प्रखर राष्ट्रवादी, महान शिक्षाविद और भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे.
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उन्होंने ‘एक देश में दो निशान, दो प्रधान और दो विधान नहीं चलेंगे’ का उद्घोष करते हुए देश की एकता, सांस्कृतिक अस्मिता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया. नेताओं ने कहा कि त्याग, तपस्या, साहस और राष्ट्रभक्ति से परिपूर्ण उनका जीवन प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणास्रोत है और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा.
-भारत एक्सप्रेस
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