DY Chandrachud on bail rights: राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित लिटरेचर फेस्टिवल में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ ने एक अहम टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को दोषी साबित होने से पहले जमानत का अधिकार मिलना चाहिए. यह बयान उन्होंने उस समय दिया जब उनसे दिल्ली दंगों के आरोपी एक्टिविस्ट उमर खालिद की जमानत खारिज होने पर सवाल पूछा गया.
निर्दोषिता की धारणा पर जोर
भारतीय न्याय व्यवस्था का आधार यह है कि हर व्यक्ति को तब तक निर्दोष माना जाता है, जब तक अदालत उसके खिलाफ अपराध साबित न कर दे. पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि अगर कोई इंसान कई साल जेल में बिताने के बाद बेगुनाह साबित हो जाए, तो उसके जीवन से खोए हुए समय की भरपाई करना असंभव है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्याय प्रणाली को इस सिद्धांत को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए.
राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में सतर्कता
पूर्व सीजेआई ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में अदालत को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में जमानत देने से पहले न्यायालय का दायित्व है कि वह गहराई से जांच करे और सभी पहलुओं पर विचार करे.
सुप्रीम कोर्ट की हालिया सुनवाई
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली हिंसा से जुड़े सात आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर विचार किया. सुनवाई के बाद अदालत ने पांच लोगों को जमानत देने का फैसला किया, जबकि उमर खालिद और शरजील इमाम की याचिकाओं को अस्वीकार कर दिया गया.
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अनुच्छेद 21 पर टिप्पणी
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने 5 जनवरी, 2026 को कहा था कि संविधान का अनुच्छेद 21 यानी जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार बेहद महत्वपूर्ण है लेकिन यह अधिकार कानूनी प्रावधानों से परे नहीं जा सकता.
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-भारत एक्सप्रेस
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