ED vs I-PAC Supreme Court Hearing : पश्चिम बंगाल में I-PAC के दफ्तरों पर हुई छापेमारी को लेकर छिड़ा कानूनी और राजनीतिक घमासान अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है. ED ने आज सुप्रीम कोर्ट में एक नई अर्जी दाखिल कर पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार को तुरंत निलंबित करने की मांग की है. ED का आरोप है कि राज्य पुलिस प्रशासन ने जांच में न केवल बाधा डाली, बल्कि केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार भी किया.
क्या कहा SC ने?
पश्चिम बंगाल के आईपैक बनाम ईडी मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज यानी गुरुवार को सुनवाई हुई. आई-पैक (I-PAC) से जुड़े छापों को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि यह याचिका किस आधार पर विचार करने योग्य है?
इस पर ईडी की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने खूब दलीलें दीं. तुषार मेहता ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र नहीं. भीड़तंत्र लोकतंत्र पर हावी हो तो यही होता है. इस दौरान ममता की ओर से पेश कपिल सिब्बल चुपचाप अपनी बारी का इंतजार करते रहे.
ED की तरफ से पेश वकील
ईडी बनाम आईपैक मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने दलील दी कि यह एक बेहद चौंकाने वाला पैटर्न सामने आ रहा है. उन्होंने कहा कि इससे पहले भी जब-जब वैधानिक प्राधिकरणों ने अपने वैधानिक अधिकारों का प्रयोग किया, मुख्यमंत्री स्वयं मौके पर पहुंच गईं. तुषार मेहता ने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र नहीं है. भीड़तंत्र लोकतंत्र पर हावी हो तो यही होता है.
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और कल्याण बनर्जी मौजूद थे. एसजी मेहता ने आगे कहा कि ऐसे ठोस सबूत मौजूद थे, जिनसे यह निष्कर्ष निकलता है कि एक परिसर में आपत्तिजनक सामग्री मौजूद थी. स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद DGP, मुख्यमंत्री, पुलिस आयुक्त, क्षेत्र के DCP और बड़ी संख्या में पुलिस बल वहां पहुंचा और बिना अधिकार के सामग्री उठा ली गई. उन्होंने इसे चोरी का अपराध बताया. SG के अनुसार, ED अधिकारी का मोबाइल फोन भी ले लिया गया और मुख्यमंत्री मीडिया के सामने भी गईं.
कपिल सिब्बल ने क्या कहा?
आई-पैक (I-PAC) पर हुई छापेमारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने विस्तृत दलीलें पेश कीं. कपिल सिब्बल ने कहा कि आई-पैक पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रबंधन का काम करता है और वर्ष 2021 में पार्टी और आई-पैक के बीच एक औपचारिक अनुबंध किया गया था. उन्होंने कहा कि यह मान लिया जाना चाहिए कि ED को इस बात की जानकारी थी. इस पर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने सवाल किया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आई-पैक कराता है या निर्वाचन आयोग.
इस पर कपिल सिब्बल ने जवाब दिया कि आई-पैक के पास पार्टी से जुड़ा बड़ी मात्रा में डेटा रहता है और जब ED वहां पहुंची तो उसे पता था कि पार्टी का काफी डेटा वहां मौजूद होगा. कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया कि चुनाव के बीच वहां जाने की क्या जरूरत थी. उन्होंने कहा कि कोयला घोटाले में आखिरी बयान 24 फरवरी 2024 को दर्ज किया गया था, उसके बाद ED क्या कर रही थी और चुनाव के बीच अचानक इतनी सक्रियता क्यों दिखाई गई. उन्होंने तर्क दिया कि यदि ED के हाथ ऐसी जानकारी लग जाती तो पार्टी चुनाव कैसे लड़ेगी. कपिल सिब्बल ने कहा कि अध्यक्ष (चेयरमैन) को वहां जाने का अधिकार था और वीडियो दिखाने पर झूठ सामने आ जाएगा.
सुनवाई की खास बातें
ED की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एएसजी राजू ने कहा कि ये मामला बेहद संगीन है. लिहाजा इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई से जांच होनी चाहिए. ईडी चाहता है मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में सुना जाए, जबकि ममता के वकील चाहते हैं कि मामला कलकत्ता हाई कोर्ट में सुना जाए. जस्टिस मिश्रा ने हल्के अंदाज में एसजी मेहता की टिप्पणी पर कहा- अगर चुनाव से पहले पैसा लॉन्ड्र किया गया तो ईडी क्या कर सकती है? इस पर एसजी मेहता ने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में अभी कोई चुनाव अधिसूचित नहीं है, सुप्रीम कोर्ट ने समय संदर्भ पर ध्यान दिया.
अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कोई मना नहीं कर रहा कि ममता वहां नहीं गई थी लेकिन याचिका की बातें पंचनामें से अलग हैं. मैं प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दायर इस याचिका की रख-रखाव (maintainability) पर गंभीर सवाल उठाता हूं. कपिल सिब्बल ने कहा कि याचिका में क्रिमिनल ट्रेसपास की बात है लेकिन इनके पंचनामें में इसका जिक्र ही नहीं है. फिर इस बात पर आए मामला सीधा सुप्रीम कोर्ट क्यों आया.
-भारत एक्सप्रेस
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