प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), अहमदाबाद ने Bitconnect क्रिप्टोकरंसी घोटाले से जुड़े मामले में मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 11 फरवरी 2025 और 15 फरवरी 2025 को अहम सर्च ऑपरेशन को अंजाम दिया. इस दौरान ईडी ने 1646 करोड़ रुपये मूल्य की विभिन्न क्रिप्टोकरंसीज़ जब्त की हैं. इसके अलावा 13,50,500 रुपये नकद, एक Lexus कार और कई डिजिटल डिवाइस भी बरामद किए गए हैं.
Bitconnect क्रिप्टोकरंसी घोटाला एक बहुचर्चित घोटाला है, जिसमें पोंजी स्कीम के जरिए हजारों निवेशकों को ठगा गया. यह घोटाला 2016 में शुरू हुआ था, जब Bitconnect नाम की क्रिप्टोकरंसी निवेशकों को भारी रिटर्न का झांसा देकर निवेश करने के लिए प्रेरित कर रही थी. लेकिन 2018 में यह योजना बंद कर दी गई, जिससे हजारों निवेशकों को भारी नुकसान हुआ.
ईडी ने इस मामले में जांच शुरू की और पाया कि *Bitconnect के माध्यम से निवेशकों से जुटाई गई भारी-भरकम रकम को क्रिप्टोकरंसी के जरिए हेरफेर कर मनी लॉन्ड्रिंग की जा रही थी*. इस पूरे घोटाले में भारत समेत कई देशों के लोग शामिल थे.
ईडी ने 11 और 15 फरवरी 2025 को अलग-अलग स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया, जिसमें बड़ी मात्रा में डिजिटल संपत्तियां और नकदी बरामद हुई.
बरामद संपत्तियों का विवरण इस प्रकार है:
- विभिन्न क्रिप्टोकरंसीज़:
- 1646 करोड़ रुपये (अनुमानित मूल्य)
- नकद: 13,50,500 रुपये
- लक्जरी कार: Lexus ब्रांड की एक कार
- डिजिटल डिवाइसेस: कई मोबाइल फोन, लैपटॉप और हार्ड ड्राइव जब्त
Bitconnect स्कीम निवेशकों को यह कहकर आकर्षित कर रही थी कि उन्हें अपने निवेश पर अत्यधिक उच्च रिटर्न मिलेगा. शुरू में कुछ निवेशकों को फायदा हुआ, लेकिन यह एक पोंजी स्कीम थी, जिसमें नए निवेशकों से मिलने वाले पैसों से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जाता था. जब स्कीम बंद हुई, तो हजारों लोगों की पूंजी डूब गई.
ईडी की यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के इस बड़े मामले में एक महत्वपूर्ण कदम है. जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और भारत में कितने निवेशकों को धोखा दिया गया.
Bitconnect घोटाले से जुड़े कई मामले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दर्ज हैं, और भारतीय एजेंसियां अन्य देशों की प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर जांच कर रही हैं. ईडी जल्द ही इस मामले में और सख्त कार्रवाई कर सकती है.
-भारत एक्सप्रेस
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