अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के छह अल्पसंख्यक समुदायों – हिंदू, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी – के वैसे लोग जो 31 दिसंबर, 2024 को या उससे पहले बिना वैध पासपोर्ट या ट्रैवल डॉक्युमेंट के भारत में प्रवेश कर गए थे या जिनके पासपोर्ट या डॉक्युमेंट की वैधता समाप्त हो गई है. उन्हें सोमवार से लागू हुए आव्रजन और विदेशी अधिनियम 2025 के तहत दंडात्मक कार्रवाई से छूट दी जाएगी.
यह प्रावधान गृह मंत्रालय द्वारा सोमवार को अधिसूचित आव्रजन और विदेशी (छूट) आदेश, 2025 का हिस्सा है. गृह मंत्रालय ने अलग-अलग अधिसूचनाओं में अधिनियम के तहत अपराधों के शमन के लिए अधिकारियों के साथ-साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी निर्देशित किया गया है.
सोमवार को भी अधिसूचित किए गए इमिग्रेशन और विदेशी अधिनियम की धारा 21 में वैध पासपोर्ट या वीज़ा के बिना भारत में प्रवेश करने वाले किसी भी विदेशी के लिए पांच साल तक की कैद और 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.
2014 से पहले आए लोगों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा
धारा 23 में तय सीमा से अधिक समय तक भारत में रहने वाले विदेशियों को तीन साल तक की जेल और/या 3 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है. हालांकि, 31 दिसंबर, 2024 से पहले आने वाले पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के गैर-मुस्लिम नागरिकों को नज़रबंदी और संभावित निर्वासन की कार्यवाही से छूट देने का नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 (CAA) के तहत उन्हीं अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने के लिए निर्धारित शर्तों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, जो 31 दिसंबर, 2014 से पहले अपने देश में धार्मिक उत्पीड़न के आधार पर भारत आ गए थे.
एक अधिकारी ने बताया, “CAA विशेष रूप से इन अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करने से संबंधित है और उनके प्रवेश की कट ऑफ तिथि 31 दिसंबर, 2014 बनी हुई है. आव्रजन और विदेशी (छूट) आदेश, 2025 में केवल यह कहा गया है कि जो लोग 31 दिसंबर, 2024 तक भारत में प्रवेश कर चुके हैं, उन्हें अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा और वे अपने पासपोर्ट और वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी या उसके बिना भी भारत में रहना जारी रख सकते हैं.”
नेपाल और भूटान के नागरिक हकदार नहीं होंगे
आदेश 2025 के तहत नेपाल और भूटान के नागरिकों के साथ-साथ तिब्बती जो 1959 और 30 मई, 2003 के बीच काठमांडू में भारतीय दूतावास द्वारा जारी विशेष प्रवेश परमिट पर भारत में प्रवेश कर चुके हैं और विदेशी पंजीकरण अधिकारियों के पास पंजीकृत हैं, उन्हें दंडात्मक कार्यवाही से इसी तरह की छूट दी गई है.
नेपाल और भूटान के नागरिक, अगर चीन, मकाऊ, हांगकांग या पाकिस्तान के रास्ते भारत में प्रवेश कर रहे हैं या बाहर जा रहे हैं, तो वे इस तरह की छूट के हकदार नहीं होंगे. भारत में विदेशियों के रहने की अवधि और बाहर जाने के प्रयोजनों के बारे में प्रावधान, पंजीकृत श्रीलंकाई तमिलों पर लागू नहीं होंगे, जिन्होंने 9 जनवरी, 2015 तक भारत में शरण ली थी.
इसके अलावा तीनों सशस्त्र बलों के सदस्य, जो अपने परिवार के साथ ड्यूटी पर भारत में प्रवेश कर रहे हैं या बाहर जा रहे हैं, उन्हें भी छूट दी गई है. राजनयिक पासपोर्ट रखने वाले विदेशियों को वीजा की आवश्यकता नहीं होगी.
वीजा अवधि से अधिक समय तक रुकने पर FRRO/इमिग्रेशन अधिकारी द्वारा तय जुर्माना लगाया जाएगा. तिब्बतियों, मंगोलिया के बौद्ध भिक्षुओं और योग्य पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और अफगान प्रवासियों के अलावा, अन्य लोगों को वीजा अवधि से 30 दिन तक रुकने पर 10,000 रुपये और 31-90 दिन से अधिक रुकने पर 20,000 रुपये का भुगतान करना होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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