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IIT में गौतम अडानी का छात्रों को तोहफा, क्यों बताया इस समय को ‘दूसरा स्वतंत्रता संग्राम’?

Gautam Adani In IIT–ISM: धनबाद IIT के 100 वर्ष पूरे होने पर अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने अपना संबोधन दिया. इस दौरान उन्होंने छात्रों को बड़ी सीख देते हुए इस समय को खास मायनों में ‘दूसरा स्वतंत्रता संग्राम’ बताया.

Gautam Adani Powerful Speech In IIT Dhanbad Announces Internships For Students

IIT–ISM में गौतम अडानी

Gautam Adani In IIT–ISM: धनबाद IIT–ISM के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उद्योगपति और अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने देश की विकास नीति, वैश्विक राजनीति और भारत की सार्वभौमिकता (Sovereignty) पर बेहद स्पष्ट और बेबाक दृष्टिकोण रखा. उन्होंने कहा कि दुनिया आज टूटे हुए वैश्विक गठबंधनों और ‘राष्ट्रीय हित पहले’ की नीति से गुजर रही है, ऐसे में भारत के लिए यह आवश्यक है कि वह अपनी विकास यात्रा किसी बाहरी दबाव से नहीं, बल्कि अपने हितों और अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर तय करे.

अडानी ने अपने संबोधन में ‘नैरेटिव कॉलोनाइज़ेशन’ का जिक्र करते हुए कहा कि जो देश दो सदियों तक दुनिया को प्रदूषित करते रहे और दुनिया के संसाधनों का दोहन करते रहे, वही अब भारत जैसे विकासशील देशों को विकास का तरीका सिखाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भारत ने अपना नैरेटिव खुद नहीं लिखा, तो दुनिया हमारे विकास के अधिकार को भी दोष की तरह पेश कर देगी.

छात्रों के लिए दो बड़े ऐलान

  • हर साल IIT–ISM के 50 छात्रों को Paid Internship. कम से कम 25% को प्री-प्लेसमेंट ऑफर मिलेगा.
  • Adani 3S Mining Excellence Centre जो मेटावर्स लैब, ड्रोन टेक्नोलॉजी, सिस्मिक सेंसिंग और प्रिसिशन मिनिंग जैसे अत्याधुनिक शोध क्षेत्रों को जोड़ेगा.

ऊर्जा और संसाधन 21वीं सदी की शक्ति

अडानी ग्रुप के चेरयमैन गौतम अडानी ने साफ कहा कि आज की दुनिया में किसी भी राष्ट्र की संप्रभुता दो स्तंभों पर खड़ी है. उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि जो अपनी धरती को समझेगा, वही अपनी नियति लिखेगा.

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गौतम अडानी ने बताया कि IIT–ISM की स्थापना भी इसी सोच का परिणाम थी. ब्रिटिश राज के कठिन समय में भी भारत को एहसास था कि खनन, भूविज्ञान और धरती से जुड़े विज्ञान भारत की भविष्य-निर्माण क्षमता का मूल हैं.

कारमाइकल विवाद से विरासत तक

अपने भाषण में अडानी ने ऑस्ट्रेलिया स्थित कारमाइकल कोयला परियोजना का विशेष उल्लेख किया और कहा कि यह परियोजना सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा की प्रतिबद्धता थी. उन्होंने बताया कि इस परियोजना को लेकर वैश्विक स्तर पर विरोध, कानूनी लड़ाइयां और वित्तीय बाधाएं खड़ी की गईं, लेकिन समूह पीछे नहीं हटा.

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साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि अडानी समूह दुनिया के सबसे बड़े नवीकरणीय ऊर्जा पार्क खवाडा (गुजरात) के 30 GW प्रोजेक्ट का निर्माण कर रहा है, जिसका बड़ा हिस्सा पहले से चालू है. उन्होंने कहा कि जब हम कोयला ऊर्जा सुरक्षा के लिए बनाते हैं, हमें दोष दिया जाता है. जब हम दुनिया का सबसे बड़ा ग्रीन एनर्जी पार्क बनाते हैं, तो वह अदृश्य हो जाता है.

‘दूसरा स्वतंत्रता संग्राम’- गौतम अडानी

अपने भाषण के अंत में उन्होंने युवाओं से कहा कि यह युग भारत के दूसरे स्वतंत्रता संग्राम का है. इस बार स्वतंत्रता राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक और संसाधन-संप्रभुता की है. उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को न केवल धरती को समझना होगा, बल्कि दुनिया के आर्थिक-ऊर्जा समीकरण को भी चुनौती देने की क्षमता विकसित करनी होगी.



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