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ऑस्ट्रेलिया में कोयला परियोजना को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने हमें खलनायक की तरह पेश किया: गौतम अदाणी

अदाणी समूह के प्रमुख ने कहा कि यह परियोजना अब स्वच्छ कोयले से उद्योगों को ऊर्जा प्रदान करती है, ऑस्ट्रेलिया में हजारों आजीविकाओं का समर्थन करती है और यह सब कंपनी के बाहरी दबाव के आगे झुकने से इनकार करने का प्रमाण है.

अदाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अदाणी ने गुरुवार को ऑस्ट्रेलिया में कारमाइकल कोयला परियोजना को लेकर समूह द्वारा झेली गई वैश्विक आलोचना और समन्वित प्रतिरोध के बारे में विस्तार से बात की.

लखनऊ स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान में फैकल्टी और छात्रों को संबोधित करते हुए, अदाणी समूह के अध्यक्ष ने विवादास्पद परियोजना को क्रियान्वित करने के लिए एक दशक लंबे संघर्ष को मजबूती की एक निर्णायक परीक्षा बताया, जिसने न केवल एक कंपनी, बल्कि एक व्यक्ति को भी बदल दिया.

गौतम अदाणी ने कहा, “ऑस्ट्रेलिया में, अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने हमें खलनायक बना दिया. बैंक पीछे हट गए. बीमा कंपनियों ने हमारा समर्थन करने से इनकार कर दिया. कार्यकर्ताओं ने सड़कें जाम कर दीं. कानूनी मुकदमे दायर किए गए. अदालतों में हम पर आरोप लगाए गए, संसद में बहस हुई और हमारी खूब आलोचना की गई और यह हेडलाइन बनी. जमीनी स्तर पर हमारे लोगों को परेशान किया गया. हमारे अधिकार और अस्तित्व पर सवाल उठाए गए. हम जहां भी गए, संदेश स्पष्ट था, पीछे हटो.”

लेकिन, उन्होंने ऐसा नहीं किया. गौतम अदाणी का कारमाइकल खदान प्रकरण का विवरण परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव को कमजोर करने का प्रयास नहीं था. इसके बजाय उन्होंने इसे एक नैतिक और रणनीतिक विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया.

भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता को सुरक्षित करने की ओर एक और कदम

यह कोयले का स्मारक नहीं था, जैसा कि आलोचकों ने आरोप लगाया था, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा का स्मारक था. यह कोई व्यवसायिक फायदे के लिए नहीं है, बल्कि एक राष्ट्रीय अनिवार्यता है.

उन्होंने कहा, “यह केवल कोयले की खदान को पा लेने की महत्वाकांक्षा नहीं थी. यह भारत को बेहतर गुणवत्ता वाला कोयला उपलब्ध कराने के परिणाम से पैदा हुआ था. यह कार्बन उत्सर्जन को कम करने और साथ ही भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता को सुरक्षित करने के परिणाम से पैदा हुआ था.”

इस परियोजना को राजनीतिक रूप से इतना जटिल इसके स्थान और समय ने बनाया था. यहां एक भारतीय कंपनी दुनिया के सबसे कड़े नियमों वाले लोकतंत्रों में से एक में प्रवेश कर रही थी और संगठित, अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय विरोध के बावजूद अपनी सबसे बड़ी ऊर्जा परियोजनाओं में से एक बनाने का प्रस्ताव रख रही थी.

उन्होंने कहा, “ऑस्ट्रेलिया में हमारी कोई राजनीतिक पूंजी नहीं थी. कोई ऐतिहासिक उपस्थिति नहीं थी. कोई संस्थागत समर्थन नहीं था. फिर भी, हम अपनी बात पर अड़े रहे.”

यह परियोजना अब स्वच्छ कोयले से उद्योगों को ऊर्जा प्रदान करती है

गौतम अदाणी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब भारत की ऊर्जा रणनीति नए सिरे से वैश्विक समीक्षा के घेरे में है. ऑस्ट्रेलिया प्रकरण पर उनकी टिप्पणियों ने उनके भाषण में व्याप्त एक व्यापक विषय को स्पष्ट किया कि साहसिक नेतृत्व अक्सर प्रतिरोध को आमंत्रित करता है और बिना किसी आश्वासन के दृढ़ विश्वास दीर्घकालिक प्रभाव के लिए एक आवश्यक शर्त है.

कारमाइकल परियोजना, जो एक साहसिक दांव के रूप में शुरू हुई थी, तब से आर्थिक और रणनीतिक दोनों रूप से एक महत्वपूर्ण भारत-ऑस्ट्रेलियाई गलियारे के रूप में विकसित हुई है.

अदाणी समूह के प्रमुख ने कहा कि यह परियोजना अब स्वच्छ कोयले से उद्योगों को ऊर्जा प्रदान करती है, ऑस्ट्रेलिया में हजारों आजीविकाओं का समर्थन करती है और यह सब कंपनी के बाहरी दबाव के आगे झुकने से इनकार करने का प्रमाण है.

उन्होंने इसे जीवाश्म ईंधन की कहानी नहीं, बल्कि सहनशीलता की कहानी बताया. सटीकता और भावनात्मक स्पष्टता के साथ दिया गया यह भाषण पारंपरिक बिजनेस स्कूल के व्याख्यानों से बिल्कुल अलग था. इसमें कोई स्लाइड, कोई चार्ट और कोई हेजिंग नहीं थी.

इसके बजाय, गौतम अदाणी ने जोखिम, विश्वास और अवज्ञा में निहित एक अलिखित व्यक्तिगत दर्शन प्रस्तुत किया. उन्होंने छात्रों से कहा कि केवल बिजनेस फ्रेमवर्क भविष्य को आकार नहीं दे सकते. भविष्य का निर्माण वे लोग करते हैं, जो ऐसे नक्शे बनाने को तैयार रहते हैं, जहां कोई नक्शा ही नहीं है.

आसान रास्ता शायद ही कभी यादगार जीवन का निर्माण करता है

यह प्रतिरोध कॉर्पोरेट बहादुरी के रूप में नहीं था. यह बड़े और कठिन सवालों के संदर्भ में था, एक ऐसी दुनिया में नेतृत्व के बारे में जहां वैश्विक शासन और वैचारिक सक्रियता के बीच की रेखा तेजी से धुंधली होती जा रही है.

अपने पूरे संबोधन में गौतम अदाणी इस विचार पर लौटते रहे कि असाधारण परिणामों के लिए दृढ़ संकल्प और दृढ़ता की आवश्यकता होती है. उन्होंने छात्रों से कहा, “आसान रास्ता शायद ही कभी यादगार जीवन का निर्माण करता है.”

ऑस्ट्रेलिया के बारे में उनका विवरण एक चेतावनी भी था, जो यह याद दिलाता है कि वर्तमान में व्यवधान का शायद ही कभी जश्न मनाया जाता है. अक्सर, केवल पीछे मुड़कर देखने पर ही ऐसे विकल्पों को उनके वास्तविक रूप में देखा जाता है. अपने भाषण के अंत में, अदाणी समूह के अध्यक्ष ने अतीत को परिपूर्ण या भविष्य को पूर्वानुमानित दिखाने का कोई प्रयास नहीं किया.

इसके बजाय, उन्होंने छात्रों को असुविधाओं का सामना करने, कठिनाइयों का स्वागत करने और यह समझने के लिए आमंत्रित किया कि महानता संघर्ष का अभाव नहीं, बल्कि उस पर विजय प्राप्त करना है. उन्होंने कहा, “अपनी यात्रा को इस बात का प्रमाण बनने दें कि भारतीय धरती में निहित सपने तब भी अडिग रह सकते हैं, जब दुनिया उन्हें कुचलने की कोशिश करे.”


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-भारत एक्सप्रेस



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