New CDS India: जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने आज देश के तीसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का पद संभाल लिया. वे ऐसे समय में यह जिम्मेदारी ले रहे हैं जब भारतीय सेना बड़े बदलावों की प्रक्रिया से गुजर रही है. उन्हें न केवल पहले CDS द्वारा शुरू किए गए अधूरे काम पूरे करने होंगे बल्कि नई चुनौतियों का सामना भी करना होगा.
रणनीतिक मामलों के जानकार
राजा सुब्रमणि को पाकिस्तान और चीन से जुड़े सुरक्षा मुद्दों का विशेषज्ञ माना जाता है. वे नॉर्दन और सेंट्रल कमांड में काम कर चुके हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार भी रहे हैं. अब CDS के रूप में उनकी असली परीक्षा संस्थागत सुधारों और सैन्य ढांचे में बदलाव को लेकर होगी.
थिएटर कमांड की चुनौती
सबसे बड़ी जिम्मेदारी इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड को लागू करने की है. इसका ब्लूप्रिंट रक्षा मंत्रालय को सौंपा जा चुका है, लेकिन इसे जमीन पर उतारना अभी भी कठिन काम है. कमांड स्ट्रक्चर और कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल बाकी हैं. पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान ने भी कहा था कि ढांचागत बदलाव से ज्यादा मुश्किल मानसिकता बदलना है. उन्होंने माना कि भारत इस प्रक्रिया में अन्य देशों से 10-15 साल पीछे है और काम तेजी से करना जरूरी है.
सेनाओं के बीच तालमेल
वर्तमान में भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के पास कुल 17 अलग-अलग कमांड हैं. थिएटर कमांड बनने के बाद भी तीनों सेनाओं की कार्यसंस्कृति, प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक्स और खरीद प्रणाली में तालमेल बैठाना बड़ी चुनौती होगी. असली मकसद यह है कि तीनों सेनाएं एक साथ मिलकर काम करें और वास्तविक जॉइंटनेस हासिल हो.
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आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता
नए CDS को यह भी देखना होगा कि आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता दोनों में संतुलन बना रहे. सरकार लगातार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर दे रही है, लेकिन हथियार और उपकरणों की डिलीवरी में देरी चिंता का विषय है. उदाहरण के लिए, एयरफोर्स को स्वदेशी तेजस मार्क-1ए फाइटर जेट मिलने में दो साल से ज्यादा की देरी हो चुकी है. ऐसे कई प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन आगे खिसकती रहती है. राजा सुब्रमणि को यह सुनिश्चित करना होगा कि आत्मनिर्भरता बढ़े लेकिन आधुनिकीकरण की रफ्तार धीमी न पड़े.
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-भारत एक्सप्रेस
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