देश की सियासत और दिल्ली के गॉसिप गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर (George Kurian Resignation) सामने आ रही है. मोदी सरकार में केंद्रीय अल्पसंख्यक और मत्स्य राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने मंगलवार (23 जून) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तत्काल प्रभाव से कुरियन का इस्तीफा मंजूर भी कर लिया है. बता दें कि 21 जून को राज्यसभा का 6 साल का कार्यकाल पूरा होने के ठीक दूसरे दिन आई इस विदाई ने देश के राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है और मोदी कैबिनेट में एक बड़े महा-फेरबदल की अटकलों को हवा दे दी है.
केरल के चुनावी नतीजे से है कनेक्शन?
केरल से ताल्लुक रखने वाले 65 वर्षीय दिग्गज ईसाई नेता जॉर्ज कुरियन साल 1980 (बीजेपी की स्थापना) से ही पार्टी के वफादार सिपाही रहे हैं. साल 2024 में बीजेपी ने केरल की 19 प्रतिशत ईसाई आबादी को साधने और वहां पैर जमाने के लिए उन्हें मोदी कैबिनेट में जगह दी थी. हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल विधानसभा चुनाव में बीजेपी के उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न करने का खामियाजा जॉर्ज कुरियन को भुगतना पड़ा है.
पार्टी ने हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों में मध्य प्रदेश से उनकी जगह महासचिव तरुण चुघ को टिकट दे दिया. अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, बिना किसी पूर्व सूचना के राज्यसभा का पत्ता कटने से कुरियन के खेमे में नाराजगी थी, जिसके चलते उन्होंने कार्यकाल खत्म होते ही मंत्री पद छोड़ने का फैसला किया. अब उन्हें केरल में संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है.
कैबिनेट में बड़े फेरबदल की दस्तक? (George Kurian Resignation)
जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा महज एक मंत्री की विदाई नहीं बल्कि मोदी सरकार में होने वाले बड़े प्रशासनिक और संगठनात्मक बदलावों की शुरुआत माना जा रहा है. दरअसल कुरियन की तरह ही पंजाब से आने वाले बड़े नेता रवनीत सिंह बिट्टू को भी इस बार बीजेपी ने राज्यसभा नहीं भेजा है. हाल के दिनों में कई नए सांसदों और क्षेत्रीय दिग्गजों के एनडीए (NDA) कुनबे में शामिल होने के बाद से यह कयास तेज हैं कि आगामी हफ्तों में केंद्रीय कैबिनेट का बड़ा विस्तार हो सकता है, जिसमें चुनावी राज्यों के नए चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी.
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चुनावी राज्यों में नए राज्यपालों की एंट्री की तैयारी
बात सिर्फ केंद्रीय मंत्रियों तक सीमित नहीं है बल्कि केंद्र सरकार जल्द ही 4 से 5 राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति की भी बड़ी तैयारी में है. इनमें से कई राज्य ऐसे हैं जहां जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में प्रशासनिक, राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर हो रही इस ‘महा-सर्जरी’ को बीजेपी की आगामी चुनावी तैयारियों और नए चेहरों को सेट करने की बड़ी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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