Gwalior Cyber Crime News: ग्वालियर/मनोज चौबे: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जिसके तार सीधे पाकिस्तान से जुड़े हुए हैं. ग्वालियर के पॉश इलाके कैलाश विहार स्थित ‘होटल एचजी’ (Hotel HG) में क्राइम ब्रांच ने छापा मारकर चार एजेंटों को दबोचा है. चौंकाने वाली बात यह है कि पकड़े गए सभी आरोपी नर्सिंग के छात्र हैं, जो पढ़ाई की आड़ में पाकिस्तानी आकाओं के इशारे पर भारत में एक बड़े वित्तीय अपराध (Financial Crime) को अंजाम दे रहे थे.
होटल का कमरा बना था हाई-टेक कंट्रोल रूम (Pakistan cyber fraud connection Gwalior)
क्राइम ब्रांच को जब इस फ्रॉड की सीक्रेट लोकेशन मिली और पुलिस ने दबिश दी, तो वहां का नजारा किसी ‘हाई-टेक कंट्रोल रूम’ जैसा था. जांच में पता चला कि ये चारों आरोपी पिछले 10 दिनों से इसी होटल में डेरा डाले हुए थे. पुलिस के अनुसार, यह गिरोह सिर्फ सीधे तौर पर बैंकिंग फ्रॉड ही नहीं कर रहा था, बल्कि जांच एजेंसियों को चकमा देने के लिए ‘मनी ट्रेल’ (Money Trail) को उलझाने में भी माहिर था.
पाकिस्तानी नंबर (+92) से मिलते थे सीधे निर्देश (Gwalior Crime Branch raid)
पुलिस की रेड में सबसे बड़ा खुलासा आरोपियों के मोबाइल फोन से हुआ. इन एजेंटों के वॉट्सऐप पर सीधे पाकिस्तान के नंबरों (जिनका कंट्री कोड +92 था) से मैसेज और कॉल आ रहे थे. सीमा पार बैठे मास्टरमाइंड इन छात्रों को स्टेप-बाय-स्टेप निर्देश दे रहे थे कि कैसे और कहां पैसा ट्रांसफर करना है.
क्या था ठगी का तरीका?
पकड़े गए आरोपियों की पहचान ग्वालियर के डीडी नगर निवासी अंकित गुर्जर, मुरैना के सौरभ श्रीवास, और राजस्थान (धौलपुर) के अजय शर्मा व सौरभ सेजवार के रूप में हुई है. इन चारों की दोस्ती नर्सिंग की पढ़ाई के दौरान हुई थी और मुरैना के सौरभ के माध्यम से ये अपराध की दुनिया में उतरे.
पूछताछ में आरोपियों ने कबूला कि वे स्थानीय भोले-भाले लोगों को चंद रुपयों का लालच देकर उनके बैंक खाते खरीद लेते थे. साइबर की भाषा में इन खातों को ‘म्यूल अकाउंट’ (Mule Accounts) कहा जाता है. इन्हीं किराए के खातों में साइबर ठगी का ब्लैक मनी मंगाया जाता था, जिसे बाद में पाकिस्तानी आकाओं के नेटवर्क में ट्रांसफर कर दिया जाता था.
मास्टरमाइंड की तलाश तेज
फिलहाल पुलिस ने चारों आरोपी छात्रों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके लैपटॉप, मोबाइल फोन व अन्य डिवाइस जब्त कर लिए हैं. पुलिस अब उस असली मास्टरमाइंड की तलाश में जुट गई है जो पाकिस्तान से इन्हें ऑपरेट कर रहा था. इस रेड के बाद केंद्रीय खुफिया एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं और ‘मनी ट्रेल’ की गहराई से जांच की जा रही है.
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