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हरिद्वार में गूंजा ‘हर-हर महादेव’, कठोर साधना में लीन स्वामी कैलाशानंद गिरि के दर्शन के लिए उमड़े भक्त

मंदिरों में हर-हर महादेव के जयघोष के बीच आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज की कठोर साधना श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बनी हुई है.

हरिद्वार: सावन का दूसरा सोमवार भगवान शिव की भक्ति, साधना और संकल्प का ऐसा पावन अवसर है, जब देश का वातावरण ही शिवमय दिखाई देने लगता है. मंदिरों में घंटियों की गूंज, हर-हर महादेव के जयघोष और जलाभिषेक के बीच हर शिवभक्त अपने आराध्य से सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहा है. इसी बीच हरिद्वार में आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज की कठोर साधना श्रद्धा और आध्यात्मिक आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है.

सनातन परंपरा में सावन को भगवान शिव का अत्यंत प्रिय मास माना गया है. सोमवार का दिन शिव आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है. सावन के दूसरे सोमवार पर की गई शिव उपासना भक्त के भीतर श्रद्धा, संयम और आत्मबल को जागृत करने का अवसर मानी जाती है. यही कारण है कि देशभर के शिवालयों में आज श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है.

हरिद्वार में निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज सावन के दौरान कठोर साधना में लीन हैं. लगातार 22 घंटे तक साधना, एक ही आसन पर रहकर शिव आराधना और तप के प्रति उनका समर्पण साधना की उस परंपरा की याद दिलाता है, जिसमें साधक अपने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं से ऊपर उठकर स्वयं को ईश्वर और समाज के कल्याण के लिए समर्पित करता है.

साधना बनी श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा

कैलाशानंद गिरि महाराज की साधना को देखने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. डिजिटल माध्यमों ने इस आध्यात्मिक साधना को देश की सीमाओं से बाहर तक पहुंचा दिया है. देश-विदेश में रहने वाले शिवभक्त भी ऑनलाइन माध्यमों से उनकी साधना और रुद्र आराधना से जुड़ रहे हैं.

यह दृश्य केवल किसी एक संत के प्रति श्रद्धा का नहीं, बल्कि सनातन परंपरा में साधना और तप की निरंतर जीवंतता का प्रमाण है.

रुद्राभिषेक में राष्ट्र कल्याण की भावना

सावन के दौरान स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज द्वारा भगवान शिव का रुद्राभिषेक भी विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है. शिव के रुद्र स्वरूप की आराधना करते हुए राष्ट्र की सुख-समृद्धि, समाज में शांति, जनकल्याण और सनातन संस्कृति की उन्नति की कामना की जाती है.

शिव आराधना का मूल संदेश भी यही है कि भक्ति केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि जीवन में संयम, करुणा, सेवा और त्याग को उतारने का माध्यम है.

दूसरा सोमवार दे रहा साधना का संदेश

सावन का दूसरा सोमवार हमें याद दिलाता है कि शिव की उपासना केवल मंदिर में जल चढ़ाने तक सीमित नहीं है. भगवान शिव का स्वरूप स्वयं तप, त्याग, वैराग्य और करुणा का प्रतीक है. इसलिए सच्ची शिवभक्ति वही है जो मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए.

कैलाशानंद गिरि महाराज की कठोर साधना इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाती दिखाई देती है. घंटों तक एकाग्र होकर साधना करना, शिव आराधना में स्वयं को समर्पित करना और श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देना—यह सब आज की पीढ़ी के लिए भी एक प्रेरक संदेश है.

सावन के दूसरे सोमवार पर हरिद्वार की धरती से उठती “हर-हर महादेव” की गूंज और कैलाशानंद गिरि जी महाराज की साधना एक साथ मिलकर उस सनातन चेतना का अनुभव करा रही है, जिसकी जड़ें हजारों वर्षों पुरानी हैं और जिसका संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है.

सावन का यह दूसरा सोमवार केवल शिव को जल अर्पित करने का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर के अहंकार, नकारात्मकता और अशांति का अभिषेक करने का भी अवसर है.

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-भारत एक्सप्रेस



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