संसद के विशेष सत्र के दौरान शुक्रवार को राज्यसभा में एक ऐतिहासिक अध्याय लिखा गया. दरअसल सदन के इतिहास में पहली बार किसी मनोनीत (Nominated) सांसद को उपसभापति के पद (Harivansh Deputy Chairman Rajya Sabha) की जिम्मेदारी सौंपी गई है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत किए गए हरिवंश नारायण सिंह को लगातार तीसरी बार निर्विरोध उपसभापति चुना गया. इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश के व्यक्तित्व और उनके जीवन से जुड़े दिलचस्प किस्सों को साझा कर सदन का दिल जीत लिया, वहीं नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक पुरानी ‘टीस’ जाहिर कर दी.
पीएम मोदी ने सुनाया 1994 का वो वाकया(Harivansh Narayan Singh)
प्रधानमंत्री मोदी ने हरिवंश को बधाई देते हुए उनके 1994 के पहले अमेरिका दौरे की एक अनसुनी कहानी सुनाई. पीएम ने बताया कि जब हरिवंश पहली बार अमेरिका गए, तो वे केवल दर्शनीय स्थलों तक सीमित नहीं रहे. 1994 में अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान हरिवंश जी उन विश्वविद्यालयों में गए, जहां से पढ़कर निकले युवाओं ने अमेरिका को एक विकसित राष्ट्र बनाया. उनके भीतर सीखने की वह ललक और शोध की प्रवृत्ति ही उन्हें दूसरों से अलग बनाती है.
साथ ही पीएम ने हरिवंश के पत्रकारिता जीवन और उनकी सादगी का जिक्र करते हुए कहा कि वे ‘लोकनायक’ जयप्रकाश नारायण (JP) के गांव से आते हैं और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के भी बेहद करीबी रहे हैं. संयोग से आज चंद्रशेखर की जयंती भी है, जिसने इस जीत को और भी खास बना दिया.
मल्लिकार्जुन खड़गे की ‘टीस’: लोकसभा के बहाने घेरा
जहां सत्ता पक्ष हरिवंश की जीत का जश्न मना रहा था, वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बधाई के साथ-साथ एक पुरानी कसक भी जाहिर कर दी. खड़गे ने राज्यसभा में उपसभापति के चयन का स्वागत तो किया, लेकिन उन्होंने लोकसभा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह देखकर अच्छा लग रहा है कि राज्यसभा में लोकतांत्रिक परंपराएं निभाई जा रही हैं, लेकिन लोकसभा में ‘डिप्टी स्पीकर’ का पद खाली होना बेहद दुखद है. खड़गे के इस बयान ने साफ कर दिया कि विपक्ष को इस बात का मलाल है कि निचला सदन यानी लोकसभा लंबे समय से बिना उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) के चल रहा है.
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क्यों खास है हरिवंश का तीसरा कार्यकाल?
हरिवंश नारायण सिंह की निर्विरोध जीत(Harivansh Deputy Chairman Rajya Sabha) उनकी निष्पक्षता और सदन चलाने के उनके कौशल पर विपक्षी दलों के भरोसे को भी दर्शाती है. वे बिहार के एक प्रखर पत्रकार रहे हैं और ‘आपातकाल’ के खिलाफ मुखर आवाज उठाने वाले जेपी के सिद्धांतों पर चलते रहे हैं. तीसरी बार इस गरिमामय पद पर बैठना न केवल उनके व्यक्तिगत कद को बढ़ाता है बल्कि राज्यसभा की परंपराओं में भी एक नया मील का पत्थर है.
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-भारत एक्सप्रेस
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