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हरियाणा पुलिस का ‘शर्मनाक इतिहास’! 3 DGP जा चुके हैं जेल; पूरन कुमार केस के बीच चर्चा में आए

Haryana Police Controversy: हरियाणा पुलिस का इतिहास बहुत साफ सुथरा नहीं है. पूरन कुमार सुसाइड केस के बीच 3 पूर्व DGP के बारे में चर्च हो रहा है जो जेल जा चुके हैं. आइये जानें क्या मामला था?

Haryana Police Controversy 3 DGP Who Were Jailed Before Y Puran Kumar Suicide Case

हरियाणा के विवादित DGP

Haryana Police Controversy: हरियाणा पुलिस के शीर्ष पद यानी डीजीपी की कुर्सी एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है. ADGP पूरन कुमार सुसाइड केस के कारण DGP डीजीपी शत्रुजीत कपूर को ‘जबरन छुट्टी’ पर दिया गया है. संभव है कि मामले की जांच के बाद उनपर आरोप साबित हों और उन्हें जेल भी जाना पड़े. हालांकि, अगर ऐसा होता है तो हरियाणा पुलिस के इतिहास में यह कोई पहली दफा नहीं होगा. इससे पहले भी प्रदेश के 3 DGP अगल-अलग मामलों में जेल की यात्रा कर चुके हैं.

शत्रुजीत कपूर से पहले भी राज्य के दो अन्य पूर्व डीजीपी एसपीएस राठौर और लक्ष्मण दास न केवल विवादों में रहे, बल्कि उन्हें जेल भी जाना पड़ा था. इसके साथ ही एक अन्य DGP लक्ष्मण दास को रिटायरमेंट के तुरंत बाद जेल जाना पड़ा था. आइये जानें इनके केस जो जिसने हरियाणा पुलिस के इतिहास (Haryana Police Controversy) में एक दाग की तरह छपे हुए हैं.

एसपीएस राठौर यौन शोषण केस

  • एसपीएस राठौर 1999 में हरियाणा के पूर्व डीजीपी डीजीपी बने और नवंबर 2000 में उन्हें छुट्टी पर भेज दिया.
  • 1990 में 14 वर्षीय टेनिस खिलाड़ी रुचिका गहरोत्रा के यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया गया.
  • 12 अगस्त 1990 को राठौर ने रुचिका को अकेले में ऑफिस में बुलाकर उसका उत्पीड़न किया.
  • शिकायत के बावजूद, राठौर ने अपने पद का दुरुपयोग कर FIR को रोका और रुचिका के परिवार को प्रताड़ित किया गया.
  • 1998 में हाई कोर्ट ने जांच CBI को सौंपी.
  • 2000 में चार्जशीट दाखिल हुई और 2002 में राठौर रिटायर हुए.
  • लगभग 20 साल बाद CBI कोर्ट ने उन्हें 6 महीने की सजा और 1,000 रुपये जुर्माना लगाया. बाद में बढ़ाकर 18 महीने किया गया.
  • 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी उम्र के आधार पर सजा को फिर 6 महीने कर दिया, जो राठौर पहले ही काट चुके थे.

लक्ष्मण दास गैंगस्टर एनकाउंटर केस

  • लक्ष्मण दास 1994-95 में हरियाणा के डीजीपी रहे हैं.
  • उनपर 1993 में गैंगस्टर जतिंदर पहल के फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगा.
  • जतिंदर की मां इशवती देवी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर हत्या का आरोप लगाया.
  • हाई कोर्ट ने जांच CBI को सौंपी.
  • रिटायरमेंट के बाद लक्ष्मण दास को गिरफ्तार किया गया और उन्होंने कई महीने जेल में बिताए.
  • दास ने दावा किया कि एक मुख्यमंत्री के दबाव को ठुकराने के कारण उन्हें फंसाया गया.
  • मार्च 2014 में अंबाला की CBI कोर्ट ने उन्हें इस मामले से बरी कर दिया.

रमेश सहगल रिश्वत कांड

  • रमेश सहगल, लक्ष्मण दास के ठीक बाद 1995 में हरियाणा के डीजीपी बने थे.
  • मई 1995 से नवंबर 1995 तक उनका कार्यकाल रहा.
  • दिसंबर 1996 में गुड़गांव के एक कारोबारी से पैरोल बढ़ाने के बदले रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया.
  • कुछ सीनियर IPS और IAS अधिकारियों ने पंचकूला में उनके घर से उन्हें गिरफ्तार किया.
  • सहगल ने दावा किया कि जलन के कारण साथी अधिकारियों ने उन्हें भ्रष्टाचार के झूठे मामले में फंसाया.
  • 2000 में रिटायर होने के बाद उनकी मौत पर यह केस बंद कर दिया गया.

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नए DGP के लिए छवी सुधारना चुनौती

डीजीपी शत्रुजीत कपूर का ‘जबरन छुट्टी’ पर भेजा जाना, हरियाणा पुलिस के एक ऐसे विवादास्पद इतिहास (Haryana Police Controversy) को फिर से खोलता है जहां शीर्ष पद पर बैठे अधिकारी गंभीर आरोपों में घिरे हैं. यह सिलसिला न केवल हरियाणा के पुलिस प्रशासन में नैतिकता और पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पद की शक्ति का दुरुपयोग किस हद तक किया गया है. वर्तमान कार्यकारी डीजीपी ओमप्रकाश सिंह के लिए इस नई जिम्मेदारी के साथ पुलिस बल की छवि और विश्वसनीयता को बहाल करने की एक बड़ी चुनौती सामने है.



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