ICAR Genome Breakthrough
ICAR Genome Breakthrough: कृषि अनुसंधान और विज्ञान के क्षेत्र में भारत ने एक बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वैज्ञानिकों ने पहली बार अरहर दाल (तुअर दाल) का कम्प्लीट (पूरा) जीनोम सफलतापूर्वक सीक्वेंस कर लिया है. इस वैज्ञानिक खोज से देश में दालों के उत्पादन में बड़ी क्रांति आने की उम्मीद जताई जा रही है. इससे पहले वर्ष 2011 में भी अरहर का एक ड्राफ्ट जीनोम तैयार किया गया था, लेकिन पहली बार भारतीय वैज्ञानिकों ने इसके डीएनए (DNA) संरचना के पूरे 100% हिस्से को पूरी सटीकता के साथ मैप कर लिया है.
क्यों महत्वपूर्ण है यह वैज्ञानिक खोज?
जीनोम मैपिंग को किसी जीव या पौधे का ‘ब्लूप्रिंट’ या ‘डीएनए मैप’ माना जाता है. अरहर दाल का पूरा जीनोम क्रैक होने से कृषि वैज्ञानिकों को निम्नलिखित लाभ मिलेंगे:
मौसम-प्रतिरोधी किस्में: वैज्ञानिक अब ऐसी नई किस्में विकसित कर सकेंगे जो सूखा, अत्यधिक गर्मी या असमय बारिश जैसी जलवायु चुनौतियों को आसानी से झेल सकें.
कीट और बीमारियों से सुरक्षा: अरहर की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान उकठा रोग (Wilt) और बांझपन रोग (Sterility Mosaic Disease) से होता है. जीनोम मैप की मदद से अब इन बीमारियों के प्रतिरोधी पौधे तैयार किए जा सकेंगे.
ज्यादा पैदावार और कम समय: नई तकनीकों के जरिए ऐसी किस्में तैयार की जा सकेंगी जो कम समय में पककर तैयार हो जाएं और जिनकी पैदावार मौजूदा किस्मों से दोगुनी हो.
दालों में आत्मनिर्भर बनेगा भारत, कम होगी महंगाई
भारत दुनिया में अरहर दाल का सबसे बड़ा उपभोक्ता और उत्पादक है, लेकिन घरेलू मांग पूरी न होने के कारण हर साल बड़ी मात्रा में विदेशों (जैसे मोजांबिक, तंजानिया और म्यांमार) से अरहर दाल आयात करनी पड़ती है. इस रिसर्च के बाद जब देश में अरहर की नई और उन्नत किस्मों की बुआई होगी, तो उत्पादन में भारी बढ़ोतरी होगी. इससे न केवल भारत दालों के मामले में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि बाजार में आम जनता को अरहर दाल की बढ़ती कीमतों और महंगाई से भी बड़ी राहत मिलेगी.
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भारत एक्सप्रेस
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