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पूर्णिया नकली मुद्रा तस्करी मामले में कोर्ट ने दो आरोपियों को सात साल की सजा और आठ हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई

पूर्णिया नकली मुद्रा तस्करी मामले में NIA स्पेशल कोर्ट, पटना ने मंगलवार को दो आरोपियों को सात साल की सजा और आठ हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. यह मामला बांग्लादेशी और नेपाली नागरिकों से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा था.

Delhi High Court

सांकेतिक तस्वीर.

पूर्णिया नकली मुद्रा तस्करी मामले में NIA स्पेशल कोर्ट, पटना ने मंगलवार को दो आरोपियों को सात साल की सजा और आठ हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. यह मामला बांग्लादेशी और नेपाली नागरिकों से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा था.

बिहार के रहने वाले मोहम्मद मुमताज और मोहम्मद बैतुल्लाह को NIA मामले RC-01/2020/NIA/DLI में दोषी पाते हुए सजा दी गई. विशेष अदालत ने उन्हें IPC की धारा 489B, 489C, 120B और UAPA की धारा 16 एवं 18 के तहत दोषी करार दिया.

क्या है मामला?

यह मामला तीन दिसंबर 2019 को बिहार के पूर्णिया स्थित सरकारी बस स्टैंड से एक लाख नब्बे हजार पांच सौ रुपये के नकली नोटों की बरामदगी से जुड़ा है. नकली नोट दो हजार और पांच सौ रुपये के मूल्य वर्ग में थे. NIA ने जांच के बाद पाया कि कुल छह आरोपी इस साजिश में शामिल थे. इन आरोपियों ने बांग्लादेश से भारत में नकली नोटों की तस्करी कर देश की अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने की साजिश रची थी.

जांच में सामने आया कि इस मामले में मोहम्मद मुमताज, बिल्टू महतो, गोलाम मुर्तजा उर्फ सीटू, सादेक मिया, मोहम्मद बैतुल्लाह और मोहम्मद मुंशी शामिल थे. NIA की जांच में पता चला कि गोलाम मुर्तजा ने नकली नोटों की खेप मोहम्मद मुंशी से प्राप्त की थी, जिसे बाद में मोहम्मद मुमताज को सौंपा गया. मुमताज, बिल्टू महतो के निर्देश पर काम कर रहा था.


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गोलाम मुर्तजा की न्यायिक हिरासत में मौत हो चुकी है, जबकि बिल्टू महतो और मोहम्मद मुंशी अभी भी फरार हैं.

NIA ने मई 2020 से जुलाई 2021 के बीच इस मामले में चार्जशीट दायर की थी. अब तक दो दोषियों को सजा हो चुकी है, जबकि अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा जारी है.

-भारत एक्सप्रेस



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