India Japan Summit
India Japan Summit: भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के अवसर पर जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची जी का भारत में हार्दिक स्वागत किया गया. यह उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत का पहला आधिकारिक दौरा है. जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ वे नारा प्रांत से आती हैं, जो भारत और जापान की साझा बौद्ध विरासत का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. इस कारण यह यात्रा केवल कूटनीतिक ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखती है.
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज के समय में, जब विश्व अनेक चुनौतियों और अस्थिरताओं का सामना कर रहा है, देशों के बीच आपसी विश्वास सबसे बड़ी रणनीतिक शक्ति बन गया है. भारत और जापान के संबंध इसी मजबूत विश्वास की नींव पर खड़े हैं. पिछले कई दशकों में जापान ने भारत के औद्योगिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. विशेष रूप से ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों की साझेदारी ने विकास की नई संभावनाएँ खोली हैं.
उन्होंने कहा कि भारत और जापान की विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी अब एक नए चरण में प्रवेश कर रही है. दोनों देश विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं और स्वतंत्र, समृद्ध तथा नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं. लोकतांत्रिक मूल्यों और मजबूत आर्थिक व्यवस्था के आधार पर दोनों देशों ने कई नई पहलों की शुरुआत की है, जो क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और विकास को बढ़ावा देंगी.
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से प्रौद्योगिकी सहयोग पर बल दिया. उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) भविष्य के विकास का प्रमुख आधार बनेगी. इसी दिशा में दोनों देशों ने संयुक्त वक्तव्य जारी किया तथा भारतीय और जापानी संस्थानों के बीच कई समझौते हुए. जापान की उच्च गुणवत्ता वाली तकनीक और भारत की सॉफ्टवेयर विशेषज्ञता का संयोजन वैश्विक स्तर पर नवाचार को नई गति देगा.
संयुक्त रक्षा विकास परियोजना पर हस्ताक्षर
रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों ने ऐतिहासिक कदम उठाया. पहली बार भारत और जापान ने संयुक्त रक्षा विकास परियोजना पर समझौता किया, जिसके अंतर्गत नौसेना के लिए रेडियो एंटीना विकसित किया जाएगा. यह परियोजना रक्षा तकनीक में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति को भी मजबूत करेगी.
स्वास्थ्य क्षेत्र में दवा निर्माण, चिकित्सा उपकरण और जैव-प्रौद्योगिकी से जुड़े समझौते किए गए. भारत की उत्पादन क्षमता और जापान की गुणवत्ता को मिलाकर सस्ती, भरोसेमंद और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएँ विश्व तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है.
आर्थिक सहयोग पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत और जापान के बीच निवेश लगातार बढ़ रहा है. पिछले एक वर्ष में सौ से अधिक नए व्यावसायिक समझौते हुए हैं, जिनसे भारत में बड़े पैमाने पर जापानी निवेश आएगा. दोनों देशों ने अगले दस वर्षों में भारत में जापानी निवेश को कई गुना बढ़ाने तथा जापानी कंपनियों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है. भारत में व्यापार करने की सरल होती प्रक्रियाएँ इस दिशा में सहायक सिद्ध होंगी.
सुरक्षा और ऊर्जा पर बना रोडमैप
उन्होंने आर्थिक सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकताओं में से एक बताया. इसी उद्देश्य से दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा के लिए संयुक्त रोडमैप तैयार किया है. इसके अंतर्गत सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक और उन्नत सामग्री जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जाएगा.
ऊर्जा क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए. भारत-जापान बायोगैस पहल के माध्यम से भारत में बड़ी संख्या में बायोगैस और जैविक उर्वरक संयंत्र स्थापित करने में सहयोग मिलेगा. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, सतत विकास और किसानों की आय बढ़ाने में सहायता मिलेगी. इसके अतिरिक्त बैटरी, हरित हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा जैसे स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में भी दोनों देश मिलकर कार्य करेंगे.
परिवहन और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में भारत-जापान अगली पीढ़ी की गतिशीलता साझेदारी ढाँचा तैयार किया गया है. इसके माध्यम से ऑटोमोबाइल क्षेत्र की सफलता को जहाज निर्माण, विमानन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों तक विस्तारित किया जाएगा.
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जापान के संबंधों की सबसे बड़ी शक्ति दोनों देशों के लोगों के बीच का आत्मीय संबंध है. कौशल विकास, तकनीकी प्रशिक्षण, शोध, शिक्षा और स्टार्टअप के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा ताकि युवा पीढ़ी को नए अवसर प्राप्त हो सकें.
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अगले वर्ष भारत और जापान अपने राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मनाएंगे. इस अवसर पर संस्कृति, पर्यटन और रचनात्मक अर्थव्यवस्था के माध्यम से दोनों देशों के बीच आपसी संबंधों को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा.
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जापान और भारत एक-दूसरे के पूरक
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जापान की अर्थव्यवस्थाएँ एक-दूसरे की पूरक हैं. दोनों देशों के सांस्कृतिक मूल्य, लोकतांत्रिक आदर्श और आधुनिक विकास की सोच समान है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों देशों के संबंध गहरे विश्वास और सम्मान पर आधारित हैं. इसी विश्वास के बल पर भारत और जापान न केवल अपने विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करेंगे, बल्कि विश्व शांति, समृद्धि और सतत विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे.
अंत में उन्होंने जापान की प्रधानमंत्री का पुनः हार्दिक स्वागत करते हुए उनके सफल और सुखद भारत प्रवास की शुभकामनाएँ दीं तथा सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया.
-भारत एक्सप्रेस
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