भारतीय नौसेना ने एक बार फिर दुनिया को यह संकेत दिया है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसकी भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है. इसी दिशा में नौसेना का अत्याधुनिक लंबी दूरी का समुद्री टोही और पनडुब्बी रोधी विमान P-8I अमेरिका के हवाई द्वीप स्थित होनोलूलू पहुंच चुका है. यह विमान दुनिया के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यासों में गिने जाने वाले ‘रिम ऑफ द पैसिफिक’ यानी रिमपैक 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करेगा.
यह सैन्य अभ्यास 1 जुलाई से शुरू हो चुका है और 31 जुलाई तक चलेगा. इस दौरान दुनिया के कई देशों की नौसेनाएं एक साथ समुद्री सुरक्षा से जुड़े विभिन्न अभियानों का अभ्यास करेंगी. भारत की भागीदारी इस अभ्यास में केवल औपचारिक नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति उसकी गंभीर प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है.
हिंद-प्रशांत में भारत की बढ़ती भूमिका
भारतीय नौसेना ने इस तैनाती को “ब्रिजेस ऑफ फ्रेंडशिप” यानी मित्रता के पुल का प्रतीक बताया है. नौसेना का कहना है कि भारत एक स्वतंत्र, खुले, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र का समर्थक है. ऐसे बहुराष्ट्रीय अभ्यासों में हिस्सा लेने से मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ बेहतर तालमेल विकसित होता है. साथ ही समुद्री निगरानी, संयुक्त अभियानों और संचालन क्षमता को भी नई मजबूती मिलती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद अहम बन चुका है. ऐसे में भारत की सक्रिय भागीदारी यह स्पष्ट करती है कि वह क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है.
क्यों खास है P-8I विमान?
भारतीय नौसेना का P-8I विमान उसकी सबसे आधुनिक समुद्री युद्धक क्षमताओं में शामिल है. यह लंबी दूरी तक समुद्र में निगरानी करने, दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने, समुद्री सुरक्षा मिशन चलाने और वास्तविक समय में खुफिया जानकारी जुटाने में सक्षम है.
इसके अलावा यह विमान समुद्र में संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रख सकता है और जरूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण सूचनाएं उपलब्ध कराता है. यही वजह है कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था में P-8I की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है.
रिमपैक क्यों माना जाता है दुनिया का सबसे बड़ा नौसैनिक अभ्यास?
रिमपैक को दुनिया का सबसे बड़ा बहुराष्ट्रीय समुद्री युद्धाभ्यास माना जाता है. इसमें विभिन्न देशों की नौसेनाएं एक साथ कई तरह के सैन्य अभ्यास करती हैं. इनमें पनडुब्बी रोधी अभियान, वायु रक्षा, समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता, आपदा राहत, समुद्री डकैती से निपटना, बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करना और अन्य जटिल समुद्री अभियानों का प्रशिक्षण शामिल होता है.
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य भाग लेने वाले देशों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, साझा चुनौतियों से निपटने की क्षमता बढ़ाना और आधुनिक युद्ध तकनीकों का अनुभव साझा करना है. भारतीय नौसेना के लिए भी यह अभ्यास नई रणनीतियों को समझने और मित्र देशों के साथ संयुक्त संचालन की क्षमता को और मजबूत करने का अवसर माना जा रहा है.
रिमपैक में भागीदारी के साथ-साथ भारतीय नौसेना हाल के दिनों में समुद्री सुरक्षा के मोर्चे पर लगातार सक्रिय रही है. अदन की खाड़ी में बुधवार को समुद्री लुटेरों ने एक व्यापारी जहाज को निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन भारतीय नौसेना की त्वरित कार्रवाई ने उनके इरादों को विफल कर दिया.
भारतीय युद्धपोत आईएनएस त्रिकंड समय रहते मौके पर पहुंचा और संकट में फंसे मालवाहक जहाज एमवी गोल्डन आर्सेनल को सुरक्षित सहायता प्रदान की. नौसेना ने न केवल पूरे घटनाक्रम को नियंत्रित किया, बल्कि जहाज और उसके चालक दल की सुरक्षा भी सुनिश्चित की.
नौसेना के अनुसार, 1 जुलाई को सेंट विंसेंट एंड ग्रेनाडाइन्स के ध्वज वाले बल्क कैरियर एमवी गोल्डन आर्सेनल ने समुद्री लुटेरों द्वारा हमले के प्रयास की सूचना दी थी. यह घटना यमन के अदन से यात्रा के दौरान जिबूती के पूर्व-उत्तर-पूर्व में लगभग 300 समुद्री मील की दूरी पर हुई थी.
भारत की सक्रिय समुद्री मौजूदगी, रिमपैक 2026 में भागीदारी और समुद्री लुटेरों के खिलाफ तेज कार्रवाई यह दिखाती है कि भारतीय नौसेना अब केवल देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक समुद्री सुरक्षा व्यवस्था में भी एक भरोसेमंद और जिम्मेदार साझेदार के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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