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भारतीय नौसेना का प्रशिक्षण स्क्वाड्रन थाईलैंड दौरे पर, रक्षा सहयोग होगा मजबूत

भारतीय नौसेना का पहला प्रशिक्षण स्क्वाड्रन थाईलैंड के सताहिप बंदरगाह पहुंचा, जहां रॉयल थाई नेवी के साथ संयुक्त अभ्यास और रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा. यह दौरा ‘सागर’ नीति के तहत समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को सशक्त करेगा.

Indian Navy

भारतीय नौसेना का पहला प्रशिक्षण स्क्वाड्रन थाईलैंड की यात्रा पर पहुंचा है. यह दौरा भारत और थाईलैंड के बीच रक्षा सहयोग और सामरिक साझेदारी को और अधिक सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

भारतीय नौसेना का पहला प्रशिक्षण स्क्वाड्रन आईएनएस तीर, आईएनएस सुजाता और आईएनएस सुदर्शनी के साथ थाईलैंड के सताहिप बंदरगाह पहुंचा है. यह यात्रा फ्रिगेट एचटीएमएस क्राबी के निमंत्रण पर हो रही है. इस दौरे का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को बढ़ावा देना, समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना और नौसैनिक कैडेट्स को बहुपक्षीय अभ्यासों का अनुभव प्रदान करना है.

भारत और थाईलैंड के बीच लंबे समय से मजबूत सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं. दोनों देशों की नौसेनाएं समुद्री सुरक्षा, समुद्री लूट की रोकथाम, मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में नियमित रूप से सहयोग करती रही हैं. इस यात्रा के दौरान भारतीय नौसेना और रॉयल थाई नेवी के बीच समुद्री अभ्यास, पेशेवर बातचीत, खेल गतिविधियों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.

भारत-थाईलैंड के ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध

भारतीय नौसेना का यह दौरा ‘सागर’ यानी ‘क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास’ की नीति के अनुरूप है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग को बढ़ाने के लिए पेश किया था. हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत लगातार मित्र देशों के साथ अपने रक्षा सहयोग को मजबूत कर रहा है.

इस यात्रा के दौरान भारतीय नौसेना के कैडेट्स को थाईलैंड की नौसेना के साथ संयुक्त अभ्यास करने और उनकी कार्यशैली को समझने का अवसर मिलेगा. यह न केवल उनकी सामरिक क्षमता को बढ़ाएगा बल्कि उन्हें बहुपक्षीय नौसैनिक ऑपरेशनों में बेहतर अनुभव भी प्रदान करेगा.

भारतीय नौसेना के प्रशिक्षण स्क्वाड्रन की यह यात्रा भारत-थाईलैंड के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती देने में सहायक होगी. समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा और सहयोग के बढ़ते महत्व को देखते हुए, यह दौरा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की मजबूत रणनीतिक उपस्थिति को दर्शाता है. आने वाले समय में दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच और अधिक रक्षा साझेदारी देखने को मिल सकती है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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