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इंदौर के ‘पानी कांड’ पर सीएम मोहन का हंटर, आधी रात को लिया बड़ा एक्शन

Indore Bhagirathpura News: जबलपुर से लौटते ही सीएम मोहन यादव ने आधी रात को ऐसा क्या किया कि इंदौर नगर निगम में हड़कंप मच गया? एक वीडियो कॉन्फ्रेंस और तीन बड़े अफसरों की कुर्सी खिसक गई. भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद सीएम ने अफसरों को कौन सा कड़ा सबक सिखाया है और प्रदेश के लिए क्या नई गाइडलाइन जारी की है? जानिए पूरी खबर…

Indore Water Contamination CM Mohan Yadav Suspends Officers in Late Night Action

Indore Bhagirathpura News: अजय भटनागर/भोपाल: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार होने की घटना पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बेहद सख्त रुख अपनाया है. जबलपुर दौरे से लौटने के बाद देर रात मुख्यमंत्री निवास पर बुलाई गई एक आपातकालीन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में उन्होंने प्रशासन की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी जताई. सीएम ने साफ शब्दों में कहा कि जनता की जान के साथ खिलवाड़ और लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी. कार्रवाई करते हुए कड़ा संदेश दिया है.

बैठक के दौरान सीएम मोहन यादव ने नगर निगम द्वारा की गई कार्रवाई को नाकाफी बताया और असंतुष्टि जाहिर की. जिसके परिणामस्वरूप, इंदौर नगर निगम कमिश्नर (Indore Municipal Commissioner ) दिलीप कुमार यादव को पद से हटा दिया गया है. इसके अलावा, लापरवाही के आरोप में अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.

लापरवाही पर सीएम का प्रहार (Contaminated Water Indore)

भागीरथपुरा में गंदे पानी की सप्लाई के मामले में प्रशासनिक लापरवाही सामने आने पर मुख्यमंत्री ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान ही सीएम ने इंदौर के निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव को हटाने का आदेश दे दिया. उन्हें अब मंत्रालय में पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग में उप सचिव के पद पर पदस्थ किया गया है. वहीं, जमीनी स्तर पर निगरानी में चूक के लिए अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को सस्पेंड कर दिया गया है.

13 हजार घरों का सर्वे और मरीजों की स्थिति

बैठक में संभागायुक्त इंदौर ने घटना की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 28 दिसंबर को उल्टी-दस्त के मामले सामने आने के बाद प्रशासन ने मोर्चा संभाला था. कुल 13,444 घरों का सर्वेक्षण किया गया है. अब तक कुल 310 मरीज अस्पताल में भर्ती हुए थे, जिनमें से राहत की बात यह है कि 235 मरीज स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं. प्रभावित इलाके में 24 घंटे डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है और रेफरल के लिए 10 एंबुलेंस तैनात हैं. इसके अलावा, पानी के 1600 से अधिक नमूने लिए गए हैं और शिकायतों के लिए 24×7 कॉल सेंटर और हेल्प डेस्क सक्रिय कर दिए गए हैं.

मुख्यमंत्री ने दिए 10 सूत्रीय निर्देश (Mohan Yadav On Indore Case)

  • इंदौर जैसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए सीएम ने प्रदेश के सभी नगर निगमों, कलेक्टरों और महापौरों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं.
  • पाइपलाइन का चिन्हांकन: सघन आबादी और 20 वर्ष से पुरानी पाइपलाइनों की पहचान की जाए.
  • सीवर लाइन: नालियों या सीवर लाइन के पास से गुजरने वाली पानी की लाइनों को मार्क किया जाए.
  • 48 घंटे में रिपेयर: लीकेज मिलने पर 48 घंटे के भीतर मरम्मत अनिवार्य है.
  • सफाई: टंकियों और जल शोधन संयंत्रों (WTP) का 7 दिन के अंदर निरीक्षण और सफाई हो.
  • जांच: सभी जल स्रोतों का तत्काल सैंपल टेस्ट किया जाए.
  • वैकल्पिक व्यवस्था: प्रदूषण मिलने पर तुरंत सप्लाई रोकें और टैंकर से पानी दें.
  • क्लोरिनेशन: 24×7 क्लोरिनेशन सिस्टम की निगरानी हो.
  • शिकायत निवारण: पानी की शिकायतों को इमरजेंसी श्रेणी में रखकर 24 से 48 घंटे में हल करें.
  • सीएम हेल्पलाइन: गंदे पानी की शिकायतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए.
  • जागरूकता: लीकेज डिटेक्शन के लिए जनता के बीच अभियान चलाया जाए.

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समझौते के मूड में नहीं है सरकार

मुख्यमंत्री मोहन यादव की यह त्वरित और कठोर कार्रवाई यह दर्शाती है कि राज्य सरकार जनस्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है. इंदौर नगर निगम के शीर्ष अधिकारियों पर कार्रवाई करके सरकार ने पूरे प्रदेश की नौकरशाही को एक सख्त संदेश दिया है कि ‘चलता है’ वाला रवैया अब नहीं चलेगा. अब देखना होगा कि सीएम द्वारा जारी किए गए 10 सूत्रीय निर्देशों का पालन जमीनी स्तर पर कितनी मुस्तैदी से होता है.



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