Indus Water Treaty: 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि को लेकर फिर से मतभेद सामने आए हैं. पाकिस्तान का कहना है कि भारत संधि की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है और पानी रोकने की कोशिश कर रहा है. वहीं भारत का दावा है कि वह संधि के नियमों का पालन कर रहा है और पाकिस्तान अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहा है.
अमेरिका, रूस और चीन की भूमिका
इस विवाद में अमेरिका, रूस और चीन का नाम भी जुड़ रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय संधियों से खुद को अलग किया है और अब भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर भी उसकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. रूस और चीन भी इस मुद्दे पर अपने-अपने हित साधने की कोशिश कर रहे हैं.
पाकिस्तान की रणनीति
पाकिस्तान लगातार यह दावा कर रहा है कि भारत सिंधु जल संधि का पालन नहीं कर रहा. उसने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाया है और चीन व रूस का समर्थन पाने की कोशिश की है. पाकिस्तान का कहना है कि भारत जानबूझकर पानी रोककर उसके कृषि और आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचा रहा है.
भारत का पक्ष
भारत का कहना है कि वह संधि के तहत मिलने वाले अधिकारों का इस्तेमाल कर रहा है. भारतीय अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान बार-बार झूठे आरोप लगाकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की कोशिश करता है. भारत का तर्क है कि सिंधु जल संधि के तहत उसे कुछ नदियों पर पूरा अधिकार है और उसी के अनुसार काम किया जा रहा है.
अंतरराष्ट्रीय असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह विवाद और बढ़ता है तो इसका असर भारत-पाकिस्तान संबंधों पर ही नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की स्थिरता पर भी पड़ेगा. चीन और रूस की दखल से यह मामला और पेचीदा हो सकता है.
सिंधु जल संधि पर भारत-पाकिस्तान का विवाद केवल पानी का नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक हितों का भी है. आने वाले समय में यह देखना होगा कि क्या दोनों देश बातचीत से समाधान निकालते हैं या मामला और बिगड़ता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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