INS विक्रांत और INS उदयगिरि कोलंबो गए
International Fleet Review 2025: भारतीय नौसेना का गौरव स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत और स्टेल्थ फ्रिगेट INS उदयगिरि श्रीलंका की राजधानी कोलंबो पहुंचे. यह दोनों जहाजों का पहला विदेशी दौरा है, जो श्रीलंका नौसेना के 75वें स्थापना वर्षगांठ समारोह के हिस्से के रूप में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू-2025 (International Fleet Review 2025) में भाग ले रहे हैं.
यह कार्यक्रम 29 नवंबर तक चलेगा, जिसमें 30 नवंबर को मुख्य समारोह होगा. कई देशों के युद्धपोत, प्रतिनिधिमंडल और पर्यवेक्षक इस आयोजन में शामिल हो रहे हैं, जो क्षेत्रीय समुद्री सहयोग को मजबूत करने का प्रतीक है.
India’s indigenous aircraft carrier INS Vikrant, along with INS Udaygiri, is representing the Indian Navy at the International Fleet Review 2025 being hosted by the Sri Lankan Navy in Colombo from 27-29 Nov.
PS: This visit marks the maiden overseas deployment of both the ships https://t.co/a9VX1JMzRM pic.twitter.com/X5MUbxJdPT
— Defence Matrix (@Defencematrix1) November 28, 2025

भारत का पहला एयरक्राफ्ट करियर है INS विक्रांत
INS विक्रांत, जो भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक है, अपनी उन्नत क्षमताओं के साथ भारतीय नौसेना की बढ़ती ताकत का प्रतीक बन चुका है. 40,000 टन विस्थापन वाला यह पोत मिग-29के लड़ाकू विमानों और अन्य हेलीकॉप्टरों को ले जाने में सक्षम है. वहीं, INS उदयगिरि प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित आधुनिक फ्रिगेट है, जो स्टील्थ तकनीक से लैस है और एंटी-एयरक्राफ्ट, एंटी-शिप तथा एंटी-सबमरीन युद्ध में निपुण है. दोनों जहाजों के कमांडरों ने श्रीलंका नौसेना के अधिकारियों के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया. इस दौरान, भारतीय दल ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान और संयुक्त अभ्यास की योजना पर चर्चा की.

झलक रही भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी
यह कार्यक्रम भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी को भी रेखांकित करता है. श्रीलंका के साथ लंबे समय से मजबूत रक्षा संबंधों के बीच, यह आयोजन हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दर्शाता है. भारतीय नौसेना के प्रवक्ता ने बताया कि जहाज कोलंबो में रहते हुए शहर परेड, समुद्री प्रदर्शन और सामुदायिक सेवा गतिविधियों में भाग लेंगे.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि INS विक्रांत का यह पहला विदेशी मिशन न केवल तकनीकी श्रेष्ठता दिखाएगा, बल्कि भारत को क्षेत्रीय नौसैनिक नेतृत्व के रूप में स्थापित करेगा. श्रीलंका नौसेना ने भारतीय जहाजों के आगमन पर विशेष समारोह आयोजित किया, जिसमें दोनों देशों के ध्वज फहराए गए.
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