India’s First Private Orbital Rocket: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देश के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-I’ को दुनिया के सामने पेश किया. हैदराबाद स्थित प्राइवेट स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा निर्मित यह रॉकेट भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है.
PM मोदी ने आज स्काईरूट एयरोस्पेस कंपनी के नए और विशाल इनफिनिटी कैंपस (Infinity Campus) का भी उद्घाटन किया, जो तेलंगाना के हैदराबाद में स्थित है. यह कैंपस लॉन्च व्हीकल के डिज़ाइन, डेवलपमेंट, इंटीग्रेशन और टेस्टिंग का केंद्र बनेगा, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को मजबूत करेगा.

‘विक्रम-I’ की खूबियाँ: हल्का और शक्तिशाली इंजन
‘विक्रम-I’ 26 मीटर (लगभग 85 फीट) की ऊँचाई वाला एक स्मॉल-लिफ्ट ऑर्बिटल लॉन्चर है, जो अपने साथ 300 किलोग्राम तक के सैटेलाइट्स को पृथ्वी की कक्षा (ऑर्बिट) में स्थापित करने में सक्षम है. इसे विशेष रूप से छोटे उपग्रहों (स्मॉल सैटलाइट्स) को लॉन्च करने के लिए डिज़ाइन किया गया है.
पूरी तरह कार्बन कंपोजिट स्ट्रक्चर: रॉकेट का ढांचा पूरी तरह से कार्बन कंपोजिट से बना है, जिससे यह हल्का और अत्यधिक मजबूत है.
3-D प्रिंटेड लिक्विड इंजन: इसमें अत्याधुनिक 3-D प्रिंटेड लिक्विड इंजन का उपयोग किया गया है.
री-स्टार्ट क्षमता: कंपनी का दावा है कि इसका इंजन एक बार फायर होने के बाद फिर से रीस्टार्ट हो सकता है. यह खूबी इसे एक ही मिशन में कई उपग्रहों को अलग-अलग कक्षाओं में छोड़ने की क्षमता देती है.
ऑन-डिमांड लॉन्च: कंपनी के अनुसार, ‘विक्रम-I’ को ऑन-डिमांड तैयार किया जा सकता है और इसे 24 घंटे के भीतर किसी भी लॉन्च साइट से प्रक्षेपित किया जा सकता है.
किफायती लॉन्चिंग: इस रॉकेट की अनुमानित लागत लगभग ₹30-40 करोड़ है, जो वैश्विक बाजार में इसे एक किफायती विकल्प बनाती है.

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धियों से तुलना: ‘विक्रम-I’ कहाँ खड़ा है?
स्काईरूट का ‘विक्रम-I’ वैश्विक निजी अंतरिक्ष कंपनियों के रॉकेटों के साथ प्रतिस्पर्धा करेगा. एक तुलनात्मक तालिका इसकी विशिष्टता को दर्शाती है:
- श्रेणी विक्रम-I (भारत, Skyroot) इलेक्ट्रॉन (न्यूजीलैंड/अमेरिका, Rocket Lab) Falcon-9 (अमेरिका, SpaceX)
- रॉकेट ऊँचाई 26 मीटर 18 मीटर 70 मीटर
- पेलोड क्षमता 300–315 Kg 300 Kg 22,800 Kg
- बॉडी/स्ट्रक्चर कार्बन कंपोजिट कार्बन कंपोजिट एल्यूमिनियम लिथियम अलॉय
- री-यूज़ नहीं आंशिक (फर्स्ट स्टेज रिकवरी ट्रायल) हाँ
- लागत (अनुमानित) ₹30–40 करोड़ लगभग ₹62 करोड़ लगभग ₹600 करोड़
विक्रम-I स्मॉल-लिफ्ट सेगमेंट में Rocket Lab के इलेक्ट्रॉन रॉकेट को सीधी टक्कर देने के लिए तैयार है, जबकि Falcon-9 भारी और रियूजेबल लॉन्चर की श्रेणी में आता है.
स्काईरूट की यात्रा: ISRO के वैज्ञानिकों से निजी अंतरिक्ष नेता बनने तक
स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना पवन चंदना और भरत ढाका ने 12 जून 2018 को हैदराबाद में की थी. ये दोनों संस्थापक IIT पासआउट हैं और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व वैज्ञानिक रह चुके हैं.
- 2020: पहले प्राइवेट रॉकेट इंजन, ‘रमन-1’, का पहला स्टैटिक फायर टेस्ट सफलतापूर्वक किया गया.
- 2021: भारत के पहले निजी तौर पर बने क्रायोजेनिक इंजन, ‘धवन-1’, का टेस्ट फायर किया गया.
- 2022: भारत के पहले निजी सब-ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-एस’ का सफल प्रक्षेपण किया गया. यह रॉकेट 100 किमी की ऊँचाई तक गया, लेकिन पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश नहीं कर पाया था.
- 2024: सबसे बड़े प्राइवेट रॉकेट स्टेज, ‘कलाम-250’, का स्टैटिक फायर टेस्ट किया गया.
- 2025 (तैयारी): भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-I’ तैयार हुआ.

भारत का उभरता हुआ निजी स्पेस सेक्टर
भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र का विस्तार 2000 के बाद तेज हुआ, और अब 300 से अधिक स्टार्टअप इस क्षेत्र में कार्यरत हैं. स्काईरूट एयरोस्पेस इस क्षेत्र में अग्रणी है, जिसने ऑर्बिटल लॉन्च की क्षमता हासिल की है.
अन्य प्रमुख निजी कंपनियां
अग्निकुल कॉसमॉस: यह आईआईटी मद्रास से जुड़ी कंपनी है, जो 3डी प्रिंटिंग तकनीक से ‘अग्निबान’ रॉकेट तैयार कर रही है. यह छोटे उपग्रहों के लिए तेज और सस्ती सेवाओं की योजना बना रही है.
बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस, ध्रुव, और एस्ट्रोगेट जैसी कंपनियां भी रॉकेट और सैटेलाइट डेवलपमेंट के क्षेत्र में काम कर रही हैं.
स्काईरूट का ‘विक्रम-I’ भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल कर देगा, जिनके पास निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल हैं. 2026 में होने वाली इसकी पहली लॉन्चिंग पर पूरे विश्व की निगाहें टिकी रहेंगी.
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