Iran crisis Indian ships Strait of Hormuz rescue plan: मिडिल ईस्ट में मचे कोहराम और ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ में छिड़ी जंग के बीच भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है. कच्चे तेल (Crude) और गैस (LNG) की सप्लाई को सुरक्षित करने के लिए गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक बेहद पावरफुल ‘तीन सदस्यीय कमेटी’ का गठन किया गया है. इस कमिटी में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को भी शामिल किया गया है.
इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती उन 24 भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकालना है, जो स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के दूसरी तरफ फंसे हुए हैं. इन जहाजों पर 600 से ज्यादा भारतीय क्रू मेंबर्स मौजूद हैं. सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह खुद इस ऑपरेशन की मॉनिटरिंग कर रहे हैं ताकि युद्ध क्षेत्र में फंसे हमारे नागरिकों और देश की एनर्जी सप्लाई को आंच न आए.
ईरान से ‘स्पेशल डील’ की तैयारी?
खबर है कि भारत सरकार ईरान के साथ लगातार संपर्क में है. ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका और उसके समर्थकों के एक बूंद तेल को भी हॉर्मुज से नहीं गुजरने देगा, लेकिन भारत के साथ पुरानी दोस्ती को देखते हुए ‘सीमित संख्या’ में भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता (Safe Passage) देने पर चर्चा चल रही है. फिलहाल भारत के दो जहाज ‘परिमल’ और ‘पुष्पक’ इसी रास्ते से गुजर रहे हैं, जिन पर सरकार की पैनी नजर है.
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अमित शाह की क्या रणनीति?
सूत्रों का कहना है कि शाह का फोकस सप्लाई चेन को डायवर्ट करने पर भी है. हॉर्मुज का रास्ता बंद होने के बावजूद भारत ने अन्य वैकल्पिक रास्तों से सप्लाई को 55% से बढ़ाकर 70% कर दिया है. सरकार का सीधा संदेश है कि दुनिया में युद्ध चले या कीमतें बढ़ें, भारत के बाजार में न तो तेल की कमी होने दी जाएगी और न ही गैस की.
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-भारत एक्सप्रेस
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