Israel Iran conflict: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब भारतीयों तक पहुंच गया है. राजस्थान के नागौर जिले के खींवताना गांव के दलीप सिंह ईरान-इजरायल संघर्ष की चपेट में आ गए. एक मार्च की सुबह ओमान के खासब पोर्ट पर खड़े क्रूड ऑयल टैंकर ‘एमवी स्काईलाइट’ पर ईरान की ओर से दागी गई मिसाइल ने जहाज को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया. जहाज के आगे के हिस्से में ड्यूटी पर मौजूद दलीप सिंह इस हमले में लापता हो गए.
मौके पर कप्तान की मौत
हमले के दौरान जहाज सर्विसिंग के लिए पोर्ट पर खड़ा था. मिसाइल या ड्रोन बोट सीधे जहाज से टकराई और जोरदार धमाका हुआ. बिहार के कैप्टन आशीष कुमार की मौके पर ही मौत हो गई, उनका शव बरामद कर लिया गया है. वहीं दलीप सिंह का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है. ओमानी रेस्क्यू एजेंसियां लगातार समुद्र और मलबे में तलाश कर रही हैं लेकिन तीन दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिला.
परिवार का दर्द
दलीप सिंह ने महज एक महीने पहले ही मुंबई की स्काईलाइट कंपनी के इस टैंकर पर नौकरी शुरू की थी. 28 फरवरी को उन्होंने आखिरी बार घर फोन किया था. मां से बात करते हुए वे खुश थे और जल्द लौटने की बात कर रहे थे लेकिन यह बातचीत उनकी जिंदगी की आखिरी साबित हुई. कंपनी ने परिवार को उनकी मौत की सूचना दे दी है, लेकिन शव न मिलने से परिजन टूट चुके हैं.
गांव में मातम और प्रशासन से गुहार
खींवताना गांव में जैसे ही खबर पहुंची, पूरा इलाका गमगीन हो गया. लोग रो रहे हैं, परिजन बेसुध हैं. गांव वालों की मांग है कि दलीप सिंह का शव जल्द भारत लाया जाए ताकि अंतिम संस्कार हो सके.
भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर सवाल
यह घटना विदेशों में काम कर रहे हजारों भारतीय श्रमिकों और नाविकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है. ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री मार्ग को असुरक्षित बना दिया है, जहां रोजाना लाखों बैरल तेल की आवाजाही होती है.
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नागौर के इस बेटे को गांव और देश की ओर से श्रद्धांजलि दी जा रही है. दलीप सिंह जैसे अनगिनत भारतीय विदेशों में मेहनत कर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं. उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना अब सरकार और कंपनियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन गई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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