Jaishankar Finland Speech: वैश्विक कूटनीति के मंच पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर का एक बार फिर वो खूंखार और बेबाक अंदाज देखने को मिला है, जिसने पश्चिमी देशों के पाखंड की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं. फिनलैंड में आयोजित प्रतिष्ठित ‘कुल्तारांता टॉक्स’ (Kultaranta Talks) के दौरान जब यूरोपीय डेलिगेट्स ने रूस-यूक्रेन युद्ध और रूसी तेल खरीद को लेकर भारत की ‘नैतिकता’ पर सवाल उठाने की कोशिश की.
जिसके बाद जयशंकर ने वहीं मंच से यूरोप का ऐसा ‘धागा खोला’ कि पूरा पश्चिमी खेमा शर्म से लाल हो गया. जयशंकर ने दोटूक कहा कि इतिहास गवाह है कि भारतीय हथियारों से कभी किसी यूरोपीय देश पर हमला नहीं हुआ, लेकिन यूरोप के बेचे हथियारों से भारत दशकों से जख्म खा रहा है.
Participated in a Panel discussion at Kultaranta Talks with FM Elina Valtonen of Finland, and Assistant FM Lana Nusseibeh of UAE on ‘Emerging Powers and the New Geopolitical Competition https://t.co/S7MQD5wwFc
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) June 11, 2026
जयशंकर का यूरोप पर अचूक वार(Jaishankar Finland Speech)
पैनल चर्चा में जब फिनलैंड की विदेश मंत्री एलीना वाल्टोनेन की मौजूदगी में भारत पर ‘नैतिक समानता’ (Moral Equivalence) का आरोप लगाने की कोशिश की गई, तो जयशंकर ने इतिहास का आईना सामने रख दिया. उन्होंने गरजते हुए कहा कि किसी भी यूरोपीय देश पर कभी भारतीय हथियारों से हमला नहीं हुआ है.
काश मैं यही बात भारत के संदर्भ में यूरोपीय हथियारों के लिए भी कह पाता. विदेश मंत्री का सीधा इशारा उन यूरोपीय देशों की तरफ था, जो सालों से उन ताकतों को घातक हथियार बेचते रहे जिन्होंने भारत की सीमाओं पर आतंक और युद्ध को बढ़ावा दिया. इसके बावजूद भारत ने कभी ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जिससे यूरोप की सुरक्षा को खतरा पहुंचे.
रूसी तेल खरीदने को लेकर क्या बोले?
रूसी तेल खरीदने को लेकर पश्चिमी देशों के दोहरे रवैये पर जयशंकर ने उन्हें बुरी तरह रगड़ दिया. उन्होंने कूटनीतिक गणित समझाते हुए कहा कि भारत की तेल नीति किसी राजनीतिक विचारधारा पर नहीं बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और बाजार की उपलब्धता पर टिकी है. जयशंकर ने पोल खोलते (Jaishankar Slams Europe) हुए कहा कि यूरोपीय देश खुद मिडल-ईस्ट (मध्य पूर्व) का वो तेल खरीद रहे थे, जो भारत का पारंपरिक सप्लायर रहा है.
जब तुम हमारा तेल उठा ले गए, तो परिस्थितियों ने हमें एक अलग दिशा में जाने के लिए मजबूर किया. उन्होंने पश्चिमी देशों को याद दिलाया कि अमेरिका ने खुद एक समय वैश्विक बाजार में संतुलन बनाने के लिए भारत द्वारा रूसी तेल खरीदे जाने की वकालत की थी.
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यूरोप की दादागिरी की खोली पोल
जयशंकर का यह रुख (Jaishankar Destroys Europe) साफ करता है कि साल 2026 के नए भारत की विदेश नीति पूरी तरह स्वतंत्र, संप्रभु और ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) के सिद्धांत पर चलती है. यूरोप को अभी भी लगता है कि दुनिया केवल उसके ईर्द-गिर्द घूमती है, लेकिन जयशंकर ने साफ कर दिया कि भारत किसी भी गुट का हिस्सा बने बिना अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को सर्वोपरि रखेगा. भारत ने जितना यूक्रेन को समझाया है, उतना ही रूस को भी हड़काते हुए कहा है कि युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की बलि चढ़ाकर यूरोप के एजेंडे पर मोहर लगाएगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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