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7 घंटे तक तड़पता रहा JDU विधायक का बेटा, क्या मौत के लिए दोषी है नवादा की अस्पताल? FIR दर्ज

बिहार के नवादा में एक सड़क हादसे में घायल हुए JDU विधायक विभा देवी और पूर्व मंत्री राजबल्लभ प्रसाद के बेटे अखिलेश कुमार की दर्दनाक मौत ने बड़ा सियासी और प्रशासनिक तूफान खड़ा कर दिया है. मामले में अस्पताल पर गंभीर आरोप लगे हैं.

Nawada JDU MLA Vibha Devi son death

नवादा/अमन: बिहार के नवादा जिले में JDU विधायक विभा देवी और पूर्व श्रम राज्य मंत्री राजबल्लभ प्रसाद के 41 वर्षीय पुत्र अखिलेश कुमार की मौत के बाद बड़ा बवाल खड़ा हो गया है. सड़क हादसे में घायल अखिलेश की मौत को परिजनों ने महज एक हादसा नहीं, बल्कि ‘मेडिकल लापरवाही और लालच’ का नतीजा बताया है. इस मामले में नवादा के केंदुआ स्थित धर्मशीला देवी मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के खिलाफ मुफस्सिल थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है.

क्या है पूरा मामला?

परिजनों के अनुसार, 19 मार्च 2026 को अखिलेश कुमार एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए थे, जिसमें उन्हें गंभीर आंतरिक चोटें आई थीं. हादसे के तुरंत बाद उन्हें धर्मशीला देवी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. दावा किया जा रहा है कि जब अखिलेश को अस्पताल लाया गया, तब वे पूरी तरह होश में थे और अपनी स्थिति खुद बता रहे थे.

‘पैसे के लालच में 7 घंटे तक तड़पाया’

पूर्व मंत्री राजबल्लभ प्रसाद ने अस्पताल प्रबंधन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि दोपहर 1 बजे ही जांच में यह स्पष्ट हो गया था कि अखिलेश को गंभीर आंतरिक चोट है और खून का थक्का जम रहा है. इसके बावजूद, विशेषज्ञ डॉक्टरों (Specialists) की अनुपलब्धता के बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें रेफर नहीं किया.

आरोप है कि पैसे ऐंठने के लालच में अस्पताल ने जानबूझकर अखिलेश को करीब सात घंटे तक रोके रखा. यहां तक कि गंभीर हालत होने के बावजूद वेंटिलेटर युक्त एंबुलेंस की भी कोई व्यवस्था नहीं की गई. अंततः नालंदा से एंबुलेंस बुलाकर उन्हें पटना रेफर किया गया, लेकिन देरी के कारण रास्ते में ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई.

CCTV फुटेज खंगाल रही नवादा पुलिस

इस घटना के बाद राजबल्लभ प्रसाद ने मुफस्सिल थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है. पुलिस ने अस्पताल के मालिक, प्रशासक और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ IPC की धारा 304A (लापरवाही से मौत) और अन्य सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है. जांच के लिए पुलिस ने मुख्य साक्ष्य के रूप में अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड, एक्स-रे रिपोर्ट और रेफरल दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.



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