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‘मरीज ज्यादा जला है, सब्सिडी नहीं मिलेगी’; चतरा एयर एंबुलेंस हादसे ने खोला सब्सिडी का ‘काला चिट्ठा’!

चतरा एयर एंबुलेंस क्रैश में 7 मौतों के बाद झारखंड में हड़कंप है. भारत एक्सप्रेस की खास रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कैसे सब्सिडी के नाम पर विमानन कंपनियां मरीजों को ठग रही हैं और राज्य की बर्न यूनिट की हालत क्या है.

Air Ambulance Crash Chatra

Air Ambulance Crash: मधुकर आनंद/झारखंड: चतरा जिले से आई एक दिल दहला देने वाली खबर ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है. चतरा के सिमरिया इलाके में एयर बर्ड कंपनी का एक एयर एंबुलेंस क्रैश हो गया, जिसमें पायलट समेत सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. इस हादसे ने न सिर्फ सात परिवारों को उम्र भर का गम दिया है, बल्कि झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था और एयर एंबुलेंस पर दी जाने वाली सरकारी सब्सिडी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

उड़ान के 15 मिनट बाद विमान मलबे में बदला

दरअसल, मंगलवार के दिन, रांची के स्टेट हैंगर से एयर बर्ड कंपनी के विमान ने 6 स्थानीय लोगों को लेकर दिल्ली के लिए उड़ान भरी. उड़ान भरने के महज 15 मिनट बाद ही विमान चतरा के जंगलों में गिरकर मलबे में तब्दील हो गया. अब सवाल ये उठता है कि जब झारखंड सरकार एयर एंबुलेंस पर 50 फीसदी की भारी-भरकम सब्सिडी देती है, तो इस मामले में वो लाभ क्यों नहीं मिला?

जानकारी के अमुसार, जिस विमानन कंपनी का विमान क्रैश हुआ, उसी के साथ सरकार का करार है. लेकिन हादसे से पहले कंपनी ने यह कहकर मरीज को सब्सिडी पर ले जाने से मना कर दिया था कि मरीज 30 फीसदी से ज्यादा जला हुआ (बर्न) है. वहीं, कंपनी 8 लाख रुपये की पूरी रकम लेकर उसी मरीज को ले जाने के लिए तुरंत तैयार हो गई.

अब सवाल हैं कि क्या सरकारी सब्सिडी के नाम पर कोई बड़ा खेल चल रहा है? सरकार के मंत्रियों से जब इस बारे में पूछा गया, तो उनके पास कोई सीधा जवाब नहीं था.

दावों और हकीकत की जंग

विपक्षी नेताओं का सीधा आरोप है कि झारखंड में जलने वाले मरीजों के लिए कोई विशेष या पुख्ता इंतजाम नहीं हैं. रिम्स (RIMS) जैसे बड़े अस्पतालों की हालत किसी से छिपी नहीं है. हालांकि, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी इस मुद्दे पर सवाल सुनते ही भड़क गए और दावा किया कि रिम्स में हर तरह की सुविधा मौजूद है.

लेकिन अगर सुविधाएं होतीं, तो क्या इन मरीजों को अपनी जान जोखिम में डालकर दिल्ली जाने की जरूरत पड़ती? कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की का कहना है कि गंभीर इलाज के लिए बाहर जाना ही पड़ता है, वहीं पेयजल स्वच्छता मंत्री योगेंद्र महतो राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की पीठ थपथपा रहे हैं. मंत्रियों के विरोधाभासी बयानों ने जनता को असमंजस में डाल दिया है.

हादसे पर सियासत

कांग्रेस प्रधानमंत्री से मांग कर रही है कि जिस तरह अहमदाबाद विमान दुर्घटना में मुआवजा दिया गया था, वैसे ही यहां भी मृतकों के परिजनों को 2-2 करोड़ का मुआवजा मिले. वहीं, राज्य सरकार खुद कितना मुआवजा देगी, इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने सिर्फ ‘देखने’ की बात कही है.

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-भारत एक्सप्रेस



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