पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में पाक सेना की दमनकारी नीतियों और अमानवीय अत्याचारों के खिलाफ जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने पाक सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के नाम एक बेहद सख्त खत भेजा है. इस आधिकारिक पत्र में कमेटी ने साफ तौर पर कहा है कि वे हमेशा अपने अधिकारों के लिए संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीकों का पालन करते आए हैं, लेकिन पाकिस्तानी फौज ने स्थानीय जनता पर बेरहमी से बल प्रयोग किया, जिससे व्यापक स्तर पर जानमाल का नुकसान हुआ है.
अवामी एक्शन कमेटी ने नागरिक अधिकारों की बहाली की मांग करते हुए 7 जुलाई 2026 को हुई पाक सेना की बैठक को भी सिरे से रद्द कर दिया. कमेटी की ओर से कहा गया कि पाकिस्तान आज पीओके में लगातार अपना कहर बरपा रहा है, जहां हक की आवाज उठाने वाले बेगुनाह नागरिकों की जानें ली जा रही हैं और विरोध करने वाले हजारों स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं को आतंकवाद निरोधक कानूनों के तहत झूठे मुकदमों में फंसाकर काल कोठरियों में ठूंस दिया गया है.

ताकत के बल पर प्रदर्शनकारियों को कुचला जा रहा
PoJK की स्थिति पर भारतीय जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी (DGP) एसपी वैद्य (SP Vaid) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि, “पाकिस्तान की फौज को पीओके के लोगों की भलाई में कभी कोई दिलचस्पी नहीं रही है, इसलिए उनका 7 जुलाई की बैठक रद्द करना तय ही था. पाकिस्तान की हमेशा से यही थ्योरी रही है कि वहां के लोगों को ताकत के बल पर कुचल दिया जाए, लेकिन वे भूल रहे हैं कि यही कुकृत्य उन्होंने 1971 में पूर्वी पाकिस्तान में भी किया था, जिसका नतीजा यह हुआ कि पाकिस्तान के दो टुकड़े हो गए और ‘बांग्लादेश’ का जन्म हुआ.”
पीओके में पाकिस्तान के गुनाहों का काला इतिहास
गौरतलब है कि भारत के जम्मू-कश्मीर के लगभग 78,114 वर्ग किलोमीटर के विस्तृत क्षेत्रफल पर पाकिस्तान ने साल 1947 में कबाइलियों के भेष में अपनी सेना भेजकर अवैध रूप से कब्जा कर लिया था. तभी से इस भूभाग (पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान) के नागरिक बुनियादी मानवाधिकारों के लिए तरस रहे हैं. साल 2026 में भी पाकिस्तान इस पूरे क्षेत्र में केवल अपनी कठपुतली सरकार और सैन्य नियंत्रण को मजबूत करने के लिए दिखावे के लोकल और प्रशासनिक चुनाव कराने की साजिशें रच रहा है, जिसका वहां की जनता पुरजोर विरोध कर रही है.


भुखमरी, बेरोजगारी और बीमारियों से जूझ रहे लोग
आज पूरा पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान भीषण भुखमरी, बेरोजगारी और महामारियों के भयानक संकट से जूझ रहा है. इस पहाड़ी क्षेत्र में न तो इलाज के लिए आधुनिक अस्पताल हैं और न ही युवाओं के लिए रोजगार के साधन. परिवहन और लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी के मामले में भी पाकिस्तान ने इस क्षेत्र को पूरी तरह मुख्यधारा से काटकर अलग रखा है, जिसके कारण आवश्यक खाद्य सामग्री और दवाइयां भी समय पर यहां के लोगों तक नहीं पहुंच पाती हैं.
प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन कर रहा पाक
पाकिस्तान इस क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन तो कर रहा है, लेकिन विकास के नाम पर वहां के लोग केवल संगीनों के साये में जीने को मजबूर हैं. अवामी एक्शन कमेटी का यह खुला खत पाकिस्तान के इसी ताबूत में आखिरी कील साबित हो सकता है.
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