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मुख्य न्यायाधीश बनने से पहले जस्टिस बी.आर. गवई ने आतंकवाद, युद्ध और राष्ट्रीय जिम्मेदारी पर रखी साफ राय

देश के अगले मुख्य न्यायाधीश बनने जा रहे जस्टिस बी.आर. गवई ने युद्ध, आतंकवाद और राष्ट्रीय जिम्मेदारी पर अपनी स्पष्ट राय रखी. उन्होंने कहा कि युद्ध कोई समाधान नहीं, बल्कि पीड़ा का रास्ता है.

Justice BR Gavai
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) के रूप में शपथ लेने जा रहे जस्टिस बी.आर. गवई (Justice B.R. Gavai) ने आतंकवाद, युद्ध और राष्ट्रीय जिम्मेदारी पर स्पष्ट रूप से अपनी राय रखी. वे 4 मई 2025 को देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं. मीडिया से ऑफ-कैमरा बातचीत में उन्होंने बताया कि वे भारत के पहले बौद्ध मुख्य न्यायाधीश बनने जा रहे हैं.

भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव और सीजफायर की स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए जस्टिस गवई ने कहा, “युद्ध कोई समाधान नहीं होता. इससे केवल लंबी पीड़ा मिलती है, कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता.” उन्होंने यूक्रेन जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि युद्ध से राष्ट्रों को केवल विनाश और मानवीय क्षति का ही सामना करना पड़ता है.

पहलगाम हमले पर संवेदना

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की भी उन्होंने गंभीरता से निंदा की. इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी. जस्टिस गवई ने बताया कि जब उन्होंने सुबह अखबार में इस दुखद घटना के बारे में पढ़ा, तो वे बेहद आहत हुए.

उस समय भारत के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश देश से बाहर थे. जस्टिस गवई ने उनसे संपर्क कर सुप्रीम कोर्ट में हमले के पीड़ितों के सम्मान में दो मिनट का मौन रखने का प्रस्ताव रखा, जिसे तुरंत स्वीकार किया गया.

उन्होंने कहा, “न्यायाधीश भी इस देश के जिम्मेदार नागरिक होते हैं. जब पूरा देश शोक में होता है, तो सुप्रीम कोर्ट इससे अलग नहीं रह सकता.” उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसे हादसे हमें हमारी साझा राष्ट्रीय जिम्मेदारी और सामूहिक शोक की याद दिलाते हैं.

-भारत एक्सप्रेस



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