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Justice Yashwant Verma: नोटों से भरे कमरे पर जस्टिस यशवंत वर्मा का था पूर्ण नियंत्रण, अधजले नोट केस जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Justice Yashwant Verma: एक न्यूज चैनल के रिपोर्ट के मुताबिक जांच समिति ने जांच के दौरान कुल 55 गवाहों से पूछताछ की. इस दौरान जस्टिस यशवंत वर्मा का भी बयान दर्ज किया. जिसके बाद समिति ने अपनी 64 पन्नों की रिपोर्ट पेश की.

Justice Yashwant Verma

जस्टिस यशवंत वर्मा

Justice Yashwant Verma: अपने आवास के स्टोर रूम से बड़ी मात्रा में मिले अधजले नोटों के बाद उपजे विवादों को लेकर चर्चा में आए दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. 22 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के द्वारा गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि स्टोर रूम पर जस्टिस यशवंत वर्मा और उनके परिवार का पूर्ण नियंत्रण था. वहां पर किसी को जाने की इजाजत नहीं थी. जिसके बाद अब समिति ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग लाने की मांग की है.

एक न्यूज चैनल के रिपोर्ट के मुताबिक जांच समिति ने जांच के दौरान कुल 55 गवाहों से पूछताछ की. इस दौरान जस्टिस यशवंत वर्मा का भी बयान दर्ज किया. जिसके बाद समिति ने अपनी 64 पन्नों की रिपोर्ट पेश की.

जस्टिस वर्मा का था नोटों से भरे कमरे पर नियंत्रण

समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 30 तुगलक क्रिसेंट के परिसर में मौजूद जिस स्टोर रूम से नकदी मिली. उस स्टोर रूम पर जस्टिस वर्मा का पूर्ण नियंत्रण था. उसमें किसी को भी जाने की इजाजत नहीं थी. वहीं रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया कि स्टोर रूम तक सिर्फ जस्टिस वर्मा और उनके परिवार के सदस्यों की पहुंच थी. इसलिए जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त आधार है.

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ये है पूरा मामला

बता दें कि, जस्टिस वर्मा के सरकारी निवास में मार्च महीने में आग लग गई. आग स्टोर रूम में भी पहुंच गई. जब दमकल विभाग के कर्मी आग बुझाने के लिए स्टोर रूम में पहुंचे तो वहां पर बड़ी मात्रा में अधजली नोटों की गड्डियां मिली. मामला तूल पकड़ते ही जस्टिस वर्मा का इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया. हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकीलों ने इसको लेकर ऐतराज जताया. जिसके बाद उन्हें वहां कोई न्यायिक कार्य नहीं दिया गया.

4 मई को सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी गई थी रिपोर्ट

मामला बढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा पर लगे आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों की एक समिति बनाई. जिसमें पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, कर्नाटक हाीकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अनु शिवरामन और हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया शामिल थे. पैनल ने 4 मई को ही सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को ये रिपोर्ट सौंप दी, लेकिन अबतक इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है.

– भारत एक्सप्रेस



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