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Lenskart Bindi Tilak Controversy: देश में कॉर्पोरेट नीतियों और धार्मिक प्रतीकों के बीच का टकराव अब एक बड़े विवाद का रूप लेता जा रहा है. अभी TCS नासिक में कर्मचारियों के साथ हुए कथित भेदभाव और शोषण का मामला थमा भी नहीं था कि अब आईवियर दिग्गज लेंसकार्ट (Lenskart) से भी ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ जैसा ही मिलता-जुलता मामला(Lenskart hijab controversy) सामने आ रहा है. लेंसकार्ट के एक कथित इंटरनल ग्रूमिंग गाइड के लीक होने के बाद सोशल मीडिया पर यह बहस छिड़ गई है कि क्या भारतीय कंपनियां जानबूझकर हिंदू मान्यताओं और प्रतीकों को निशाना बना रही हैं?
TCS नासिक विवाद की आंच अब लेंसकार्ट तक
हाल ही में TCS नासिक के ऑफिस से कुछ ऐसी ही खबरें आई थीं जहाँ धर्मांतरण, यौन शोषण और जबरन मांस खिलाने के आरोप को लेकर विवाद खड़ा हुआ था. अब लेंसकार्ट के वायरल दस्तावेज ने इस आग में घी डालने का काम किया है. कंपनी की लीक हुई पॉलिसी के अनुसार, स्टोर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए बिंदी, तिलक और कलावा पहनने पर पाबंदी की बात कही गई है, जबकि हिजाब और पगड़ी को विशेष शर्तों के साथ अनुमति दी गई है. सोशल मीडिया पर यूजर्स इसे ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ करार दे रहे हैं और पूछ रहे हैं कि बहुसंख्यक समाज की धार्मिक पहचान पर ही कैंची क्यों चलाई जा रही है?
क्या है लेंसकार्ट के उस ‘लीक’ गाइड में?(Lenskart hijab controversy)
वायरल हो रहे दस्तावेज में दर्ज नियम कुछ इस प्रकार हैं जिन्होंने विवाद को जन्म दिया:
हिंदू प्रतीकों पर पाबंदी: “बिंदी और कलाई पर बंधे कलावा (धार्मिक धागे) की अनुमति नहीं है. सिंदूर भी माथे पर न गिरने पाए और बेहद कम मात्रा में हो.”
हिजाब को हरी झंडी: “हिजाब पहनने की अनुमति है, बशर्ते वह काले रंग का हो और कंपनी के लोगो को न ढके.”
धार्मिक पहचान पर प्रहार: कलावा हटाने और बिंदी न लगाने जैसे निर्देशों को लेकर नेटिजेंस ने लेंसकार्ट के फाउंडर पीयूष बंसल को जमकर घेरा है.
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पीयूष बंसल की सफाई: “पुराना है यह दस्तावेज”
विवाद (Lenskart hijab controversy) बढ़ता देख और ‘बायकोट लेंसकार्ट’ ट्रेंड होने के बाद ‘शार्क टैंक’ फेम पीयूष बंसल ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया. उन्होंने ‘X’ पर लिखा कि वायरल हो रहा दस्तावेज पुराना है और कंपनी की मौजूदा नीतियों का हिस्सा नहीं है. बंसल ने दावा किया कि लेंसकार्ट तिलक, बिंदी या किसी भी धार्मिक अभिव्यक्ति पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाता. उन्होंने भ्रम की स्थिति के लिए माफी मांगते हुए कहा कि उनके हजारों कर्मचारी अपनी संस्कृति और पहचान के साथ काम कर रहे हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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