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गांवों में नहीं रहेगी पानी की किल्लत! महाराष्ट्र कैबिनेट का बड़ा ऐलान, अटके प्रोजेक्ट्स को रफ्तार देने के लिए 22,898 करोड़ रुपए मंजूर

फंड की कमी के कारण परियोजनाओं के पूरा होने में हो रही देरी के मद्देनजर, महाराष्ट्र सरकार जल जीवन मिशन के लिए राज्य के निजी कोष से 22,898 करोड़ रुपए से अधिक का भारी आवंटन करेगी. यह धनराशि केंद्र सरकार द्वारा अपेक्षित राज्य के हिस्से के अतिरिक्त है.

CM Fadnavis

महाराष्ट्र सरकार ने ग्रामीण इलाकों में पानी की आपूर्ति से जुड़ी अटकी हुई परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. फंड की कमी के कारण लंबे समय से जिन योजनाओं में देरी हो रही थी, उन्हें अब गति देने के लिए राज्य अपने खजाने से 22,898 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च करेगा. यह रकम केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाले हिस्से के अलावा होगी.

यह अहम फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया. सरकार का कहना है कि इसका मकसद सिर्फ कागज़ी मंजूरी देना नहीं, बल्कि जमीन पर चल रही और लगभग पूरी हो चुकी जल आपूर्ति योजनाओं को जल्द से जल्द जनता तक पहुंचाना है.

क्यों लिया गया यह फैसला?

दरअसल, राज्य में जल जीवन मिशन के तहत कई योजनाएं अलग-अलग चरणों में अटकी हुई थीं. कहीं तकनीकी वजहें थीं तो कहीं वित्तीय बाधाएं. ऐसे में सरकार ने तय किया कि जो प्रोजेक्ट 75% से ज्यादा पूरे हो चुके हैं, उन्हें पहले पूरा किया जाए ताकि गांवों को तुरंत लाभ मिल सके.

अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरे कार्यक्रम के लिए कुल उपलब्ध धनराशि करीब 44,000 करोड़ रुपये के आसपास होगी. इसमें केंद्र सरकार लगभग 11,000 करोड़ रुपये देगी और राज्य भी लगभग उतनी ही राशि का योगदान करेगा. बाकी 22,898 करोड़ रुपये राज्य अपने निजी कोष से देगा.

कहां-कहां खर्च होगा पैसा?

यह राशि अलग-अलग महत्वपूर्ण हिस्सों में बांटी गई है. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा रेट्रोफिटिंग परियोजनाओं के लिए रखा गया है, जिस पर लगभग 10,079 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इसके अलावा संशोधित जल आपूर्ति योजनाओं के लिए 8,233 करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रावधान किया गया है.

जल गुणवत्ता सुधार, सामुदायिक भागीदारी और आधुनिक तकनीकों पर भी जोर दिया गया है. उदाहरण के तौर पर IoT आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम, इलेक्ट्रोक्लोरीनेशन यूनिट्स और राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम जैसी योजनाओं के लिए भी हजारों करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है.

अधूरी योजनाओं को पूरा करने की प्राथमिकता

सरकार ने साफ किया है कि 75% से 99% तक पूरी हो चुकी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी. इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए करीब 5,934 करोड़ रुपये राज्य अपने फंड से देगा. वहीं पूरी तरह तैयार हो चुकी योजनाओं को अंतिम रूप देने के लिए 3,769 करोड़ रुपये अलग से मंजूर किए गए हैं.

इसके अलावा, वित्त आयोग और अन्य अनुदानों के जरिए भी अतिरिक्त सहायता दी जाएगी, ताकि गांवों में पानी की सप्लाई से जुड़ी कोई भी योजना अधूरी ना रह जाए.

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भारत एक्सप्रेस



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