Maharashtra Language Controversy: महाराष्ट्र में एक बार फिर भाषा को लेकर विवाद सामने आया है. इस बार मामला मुंबई के अंधेरी मेट्रो स्टेशन का है, जहां सिर्फ हिंदी में विज्ञापन लिखे जाने पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध किया. उन्होंने स्टेशन के नाम पर कालिख पोत दी और नारेबाजी की. उनका कहना था कि मराठी को नजरअंदाज करना महाराष्ट्र की अस्मिता का अपमान है.
पहले भी विवाद
ये कोई पहली बार नहीं है जब भाषा को लेकर विवाद हुआ हो. जुलाई में मीरा रोड पर एक मिठाई दुकानदार को सिर्फ इसलिए पीटा गया क्योंकि उसने मराठी बोलने से इनकार किया था. इस घटना का वीडियो वायरल हुआ और सात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी. इनमें से तीन को नोटिस भी जारी किया गया.
इसके बाद सैकड़ों MNS कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए और मराठी गौरव की रक्षा के लिए विरोध मार्च निकाला. पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया ताकि माहौल बिगड़ने से रोका जा सके.
वीरार और पालघर में मारपीट
भाषाई विवाद यहीं नहीं रुका. जुलाई 2025 में ही वीरार और पालघर में एक ऑटो-रिक्शा चालक को मराठी न बोलने पर पीटा गया. इस बार हमला शिवसेना (UBT) के कार्यकर्ताओं ने किया. वीडियो में देखा गया कि चालक ने कहा, “हिंदी या भोजपुरी बोलना मेरा हक है.” लेकिन ऐसा कहने पर उसे थप्पड़ मारे गए और सार्वजनिक माफी मांगने को मजबूर किया गया.
महाराष्ट्र बैंक की शाखा में मारपीट
लोनावाला के महाराष्ट्र बैंक की एक शाखा में भी ऐसा ही मामला सामने आया. वहां MNS कार्यकर्ताओं ने मैनेजर से मराठी में बात करने की मांग की. जब एक कर्मचारी ने हिंदी के इस्तेमाल का समर्थन किया, तो उसे भी पीटा गया.
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इन घटनाओं से साफ है कि महाराष्ट्र में भाषा को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है. मराठी को लेकर भावनाएं गहरी हैं लेकिन हिंसा और जबरदस्ती से समाधान नहीं निकलता. भाषा का सम्मान जरूरी है लेकिन साथ ही हर नागरिक को अपनी पसंद की भाषा बोलने का अधिकार भी मिलना चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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