महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है. हाल ही में उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से वरिष्ठ नेता शरद पवार और सांसद सुप्रिया सुले की मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. इसी बीच राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की संभावनाओं को लेकर भी बहस तेज हो गई है. इन दोनों मुद्दों पर नेताओं के बयान सामने आने के बाद सियासी माहौल और गर्म हो गया है.
एकनाथ शिंदे गुट की ओर से शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत पर तीखा हमला बोला गया. बयान में कहा गया कि संजय राउत अक्सर ऐसे सवाल उठाते हैं, जिनसे विवाद बढ़ता है. साथ ही शरद पवार को महाराष्ट्र का अनुभवी और सम्मानित नेता बताते हुए कहा गया कि उनका विभिन्न नेताओं से मिलना कोई असामान्य बात नहीं है.
बयान में उद्धव ठाकरे पर भी निशाना साधते हुए दावा किया गया कि कांग्रेस के साथ जाने का फैसला शिवसेना के लिए नुकसानदायक साबित हुआ. यह भी कहा गया कि एकनाथ शिंदे को ही बड़ी संख्या में लोग बालासाहेब ठाकरे के विचारों को आगे बढ़ाने वाला नेता मानते हैं.
क्या एनसीपी एनडीए के करीब आएगी?
शरद पवार के संभावित राजनीतिक रुख को लेकर भी बयान दिया गया. इसमें कहा गया कि यदि वह कभी एनडीए के साथ आने का फैसला करते हैं, तो उनका स्वागत किया जाएगा. साथ ही यह भी जोड़ा गया कि अटल बिहारी वाजपेयी के दौर में जॉर्ज फर्नांडिस, ममता बनर्जी और नीतीश कुमार जैसे कई बड़े नेता एनडीए का हिस्सा बने थे. हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया कि फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि शरद पवार या उनकी पार्टी आगे क्या फैसला लेगी.
महायुति सरकार को बताया मजबूत
महायुति गठबंधन को लेकर भी विश्वास जताया गया. बयान में कहा गया कि गठबंधन पहले भी मजबूत था, आज भी मजबूत है और आने वाले समय में और अधिक मजबूत होगा. विपक्ष पर निशाना साधते हुए दावा किया गया कि वह अपने जनप्रतिनिधियों को एकजुट रखने में भी संघर्ष कर रहा है.
टीएमसी छोड़ने वाले नेताओं पर भी टिप्पणी
पश्चिम बंगाल की राजनीति का जिक्र करते हुए कहा गया कि तृणमूल कांग्रेस के कई पूर्व सांसद भाजपा का रुख कर रहे हैं. बयान में दावा किया गया कि पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और कई पुराने नेता अब ममता बनर्जी से दूरी बना रहे हैं.
यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर भी अपनी बात रखते हुए कहा गया कि समान नागरिक संहिता लागू होने से सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून की व्यवस्था बनेगी. बयान में यह दावा किया गया कि इससे किसी भी समुदाय को नुकसान नहीं होगा और समाज में समानता को बढ़ावा मिलेगा.
इसके साथ ही जनसंख्या और परिवार नियोजन का मुद्दा भी उठाया गया. बयान में कहा गया कि यदि परिवार छोटा हो तो बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और परवरिश पर बेहतर ध्यान दिया जा सकता है. हालांकि, यह संबंधित नेता का राजनीतिक दृष्टिकोण है और इस विषय पर अलग-अलग दलों तथा समाज के विभिन्न वर्गों की अपनी-अपनी राय है.
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-भारत एक्सप्रेस
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