सौरभ हत्याकांड में मुस्कान-साहिल को क्यों हुई फांसी?
Muskaan Sahil Death Penalty: उत्तर प्रदेश में मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में आखिरकार अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है. करीब 16 महीने तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद जिला अदालत ने मामले में दोषी पाई गई मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड देने का आदेश दिया है.
कोर्ट ने केस से जुड़े सभी पक्षों, गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों की विस्तार से जांच के बाद इसे ‘रेयर टू रेयरेस्ट’ श्रेणी का अपराध माना. इसके अलावा सबूत नष्ट करने के आरोप में दोनों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.
अदालत ने वारदात को बताया पूरी तरह सुनियोजित
सजा सुनाते समय अदालत ने कहा कि हत्या अचानक नहीं हुई थी, बल्कि इसकी तैयारी पहले से की गई थी. कोर्ट के अनुसार, आरोपियों ने वारदात को अंजाम देने के लिए बाजार से विशेष प्रकार का चाकू खरीदा था, जिससे हड्डियां तक आसानी से काटी जा सकें. इसके साथ ही एक बड़ा ड्रम भी लाया गया था.
फैसले में कहा गया कि पहले सौरभ राजपूत को खाने में नशीला पदार्थ दिया गया और फिर उसकी कमजोर हालत का फायदा उठाकर हत्या कर दी गई.
मौत के बाद भी नहीं रुकी हैवानियत
अदालत ने अपने आदेश में हत्या के बाद की गई कार्रवाई को भी बेहद क्रूर बताया. कोर्ट के मुताबिक, सौरभ की जान लेने के बाद उसके शव को तीन हिस्सों में काटा गया और उन्हें ड्रम में भर दिया गया.
इसके बाद आरोपियों ने सीमेंट का घोल तैयार कर ड्रम के भीतर डाल दिया, ताकि शव हमेशा के लिए छिपाया जा सके. न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि साहिल कुछ समय के लिए सौरभ का सिर और पैर तकिए के कवर में रखकर अपने साथ ले गया था. बाद में इन्हें भी उसी ड्रम में डाल दिया गया.
देशभर में बना चर्चा का विषय
फैसले में अदालत ने कहा कि इस घटना का असर केवल मेरठ तक सीमित नहीं रहा. इस हत्याकांड के सामने आने के बाद देश के कई हिस्सों में पति की हत्या के मामलों की चर्चा के दौरान इस केस का बार-बार जिक्र हुआ.
कोर्ट ने माना कि नीला ड्रम इस मामले के कारण भय का प्रतीक बन गया था. न्यायाधीश के अनुसार, अपराध की प्रकृति और सामाजिक प्रभाव ने इस केस को सामान्य हत्या के मामलों से अलग बना दिया, इसलिए इसे ‘रेयर टू रेयरेस्ट’ की श्रेणी में रखा गया.
महाभारत का भी दिया गया उदाहरण
फैसला सुनाते समय अदालत ने महाभारत के प्रसंग का उल्लेख भी किया. न्यायालय ने कहा कि भारतीय परंपरा और धार्मिक ग्रंथों में यह संदेश मिलता है कि बुरे कर्मों का परिणाम अंततः बुरा ही होता है.
कोर्ट ने टिप्पणी की कि मुस्कान और साहिल द्वारा किया गया कृत्य बेहद घृणित है और ऐसे अपराध का उचित परिणाम उन्हें भुगतना होगा. साथ ही अदालत ने मुस्कान की मांग पर उसकी दोनों बेटियों के संरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात भी कही.
सजा से पहले क्या बोले दोनों आरोपी?
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल साहिल और मुस्कान से फैसला सुनाने से पहले अदालत ने उनकी राय जाननी चाही. जज ने पूछा कि क्या वे अंतिम रूप से कुछ कहना चाहते हैं. इस पर साहिल ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. वहीं मुस्कान ने अपनी दोनों बेटियों की चिंता जताई और उनके भविष्य को लेकर अदालत से अनुरोध किया. कोर्ट ने उसे भरोसा दिलाया कि बच्चियों की देखभाल का समुचित प्रबंध किया जाएगा.
अभी खत्म नहीं हुए कानूनी विकल्प
हालांकि निचली अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई है, लेकिन कानूनी तौर पर उनके पास अभी भी आगे अपील करने का अधिकार मौजूद है.
दोनों दोषी तय समय सीमा के भीतर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं. यदि वहां से भी राहत नहीं मिलती है तो सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है. इसके बाद संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राष्ट्रपति के समक्ष भी दया याचिका दायर करने का विकल्प रहेगा.
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क्या था पूरा मामला?
यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से जुड़ा है. आरोप है कि पिछले वर्ष 3 मार्च को मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर पति सौरभ राजपूत की हत्या कर दी थी.
हत्या के बाद दोनों ने शव के तीन हिस्से किए और उन्हें एक नीले ड्रम में रखकर सीमेंट के घोल से सील कर दिया. वारदात के बाद दोनों हिमाचल प्रदेश घूमने निकल गए थे. लेकिन वापस लौटने के बाद पूरे मामले का पर्दाफाश हो गया.
जांच में साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. अब 16 महीने बाद अदालत ने दोनों को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई है.
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