लद्दाख पर गृह मंत्रालय
MHA Offer To Ladakh: लद्दाख में छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा और राज्य के दर्जे की मांग को लेकर भड़के हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद अब शांति बहाल हो गई है. लेह एपैक्स बॉडी (LAB) ने केंद्र सरकार के साथ आगे की बातचीत से दूर रहने का ऐलान कर दिया है. उसने साफ किया है गृह मंत्रालय (MHA) की उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC) के साथ किसी भी वार्ता में भाग नहीं लेगी. इस बीच MHA ने साफ किया है कि किसी भी समय संवाद के लिए हमेशा खुला है. केंद्र सरकार ने विश्वास जताया है कि निरंतर बातचीत से वांछित परिणाम मिलेंगे.
लेह एपैक्स बॉडी (LAB) की प्रतिक्रिया के बाद केंद्र सरकार का ओर से प्रेस विज्ञप्ती जारी की गई है. इसमें बताया गया है कि केंद्र सरकार हमेशा चर्चा के लिए तैयार है. MHA ने साफ किया है कि संवाद का रास्ता खुला है.
क्या बोली केंद्र सरकार?
केंद्र सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ती में कहा गया ‘केंद्र सरकार ने लद्दाख के मामलों पर एपेक्स बॉडी लेह (ABL) और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के साथ किसी भी समय बातचीत के लिए हमेशा खुला रुख अपनाया है. सरकार ने लद्दाख के मामलों पर एपेक्स बॉडी लेह (ABL) और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के साथ किसी भी समय बातचीत के लिए हमेशा खुला रुख अपनाया है. हम लद्दाख पर उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC) या किसी अन्य मंच के माध्यम से ABL और KDA के साथ चर्चा का स्वागत करना जारी रखेंगे.’
लद्दाख में किया गया है काम (Modi Govt On Ladakh)
लद्दाख पर उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC) के माध्यम से एपेक्स बॉडी लेह (ABL) और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के साथ स्थापित बातचीत तंत्र ने अब तक लद्दाख की अनुसूचित जनजातियों के लिए बढ़ा हुआ आरक्षण, LAHDCs में महिलाओं को आरक्षण, और स्थानीय भाषाओं का संरक्षण जैसे अच्छे परिणाम दिए हैं. केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख (Ladakh Update) में 1800 सरकारी पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है. हमें विश्वास है कि निरंतर बातचीत निकट भविष्य में वांछित परिणाम देगी.
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लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों का मामला
MHA ने अपने बयान में LAB और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के साथ लगातार बातचीत का स्वागत किया है और कहा है कि संवाद तंत्र ने ‘अच्छे परिणाम’ दिए हैं. यह गतिरोध अब सुप्रीम कोर्ट या राजनीतिक स्तर पर हल होने की प्रतीक्षा कर रहा है, क्योंकि यह मामला न केवल लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है, बल्कि भारत के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक में शांति और शासन को भी निर्धारित करेगा.
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