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‘भारत का खाते हैं पर…’ वंदे मातरम न बोलने पर विधायक बालमुकुंद आचार्य ने मुस्लिम युवक को बताया देश विरोधी

राजस्थान के हवामहल से विधायक बालमुकुंद आचार्य ने कार्यक्रम में बैठे एक आदमी से बार-बार “वंदे मातरम” और “भारत माता की जय” का नारा लगाने कहा. कई बार कहने के बाद भी व्यक्ति ने नारा नहीं लगाया.

Jaipur Vande Matram Viral Video

Vande Matram Viral Video: जयपुर के वैशाली नगर स्थित एक होटल में शिक्षकों के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में वन्दे मातरम को लेकर माहौल गर्म हो गया. राजस्थान के हवामहल से विधायक बालमुकुंद आचार्य (Balmuknd Aacharya) ने कार्यक्रम में बैठे एक आदमी से बार-बार “वंदे मातरम” और “भारत माता की जय” का नारा लगाने कहा. कई बार कहने के बाद भी व्यक्ति ने नारा नहीं लगाया, जिस पर विधायक बिफर पड़े.

हालांकि ये घटना कुछ दिन पुरानी है पर इसका वीडियो सोमवार से इंटरनेट वायरल हो रहा है.

हिंदुस्तान बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा होटल में एक निजी सम्मान समारोह आयोजित किया गया था. इस कार्यक्रम में देश भर के स्कूलों से आए 100 शिक्षकों और अन्य ने भाग लिया.

कार्यक्रम में स्टेज से विधायक बालमुकुंद आचार्य ने “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम” के नारे लगाए. जैसे ही दर्शकों ने ये नारे गूंजने शुरू किए, उन्होंने भीड़ में से एक आदमी की ओर इशारा किया और पूछा कि वह इसमें शामिल क्यों नहीं हो रहे हैं.

विधायक ने पूछा, “भाई साहब बाहर से आए हैं क्या आप? खड़े हो जाएं. आप ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ (Vande Matram) क्यों नहीं बोल रहे हैं? आपको कुछ परेशानी है क्या बोलने में? कहां से आए हो आप?”

इसके बाद वह व्यक्ति खड़ा हुआ और उन्होंने अपना नाम मोहम्मद आसिफ बताया, जो महाराष्ट्र से आए थे. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि “वंदे मातरम” कहने में कोई आपत्ति नहीं है.

कुछ लोग देश का खाते हैं पर देश के खिलाफ बोलते हैं: विधायक

वहीं विधायक बालमुकुंद ने जोर देकर कहा, “आपको देश से प्यार नहीं है? ‘वंदे भारत’ का मतलब क्या है? मैं अपनी भारत माता का नमन करता हूं. भारत पर विश्वास नहीं है आपका? तिरंगे में नहीं है? कैसे लोग हैं ये?”

आसिफ ने कहा कि उन्हें देश पर भरोसा है, फिर भी विधायक ने उन पर देश से प्रेम न करने का आरोप लगाया और कहा कि कुछ लोग देश का खाते हैं, देश में रहते हैं, पर देश के ख़िलाफ़ बोलते हैं. यह उनकी मानसिकता है आपके सामने और इस बात को आप समझिए.”

इसके बाद आचार्य मंच से नीचे उतर गए. जाते हुए, वे फिर से आसिफ के सामने रुके और पूछा कि उन्होंने “वंदे मातरम” का नारा क्यों नहीं लगाया. आसिफ के बार-बार यह स्पष्ट करने के बावजूद कि उन्हें नारों से कोई आपत्ति नहीं है, आचार्य ने फिर से उन पर वफ़ादारी की कमी का आरोप लगाया.

हम इसी धरती में दफन होते हैं, हमारी नैतिकता पर सवाल कैसे उठाया ?

इसी दौरान दर्शकों में से कुछ लोगों ने आचार्य से पूछा कि वह किसी को नारे लगाने के लिए क्यों मजबूर कर रहे हैं. आचार्य ने जवाब दिया कि वह बस यही चाहते थे कि वहां मौजूद सभी लोग नारे लगाएं.

जैसे-जैसे तनाव बढ़ता गया तभी आसिफ के बगल में बैठा एक आदमी खड़ा हुआ और गुस्से से आयोजकों से कहा, “हम दिन में पांच बार इस धरती को नमन करते हैं और इसी धरती पर दफ़न होते हैं. आप कैसे कह सकते हैं कि हम इसका सम्मान नहीं करते? देश में बेवजह सांप्रदायिक तनाव क्यों पैदा कर रहे हैं? हम भी इसी धरती के प्रति वफ़ादार हैं – हमारी नैतिकता पर सवाल कैसे उठाया जा सकता है?”

आयोजकों ने उत्तेजित शिक्षकों को शांत करने की कोशिश की और कुछ ही देर बाद कार्यक्रम समाप्त हो गया.

सोमवार को आचार्य ने मीडिया को बताया, “यह कार्यक्रम लगभग 10 दिन पहले हुआ था. मुझे शिक्षकों को सम्मानित करने के लिए आमंत्रित किया गया था. मैंने उस आदमी और कुछ अन्य लोगों से बस इतना पूछा कि वे वंदे मातरम या भारत माता की जय क्यों नहीं बोल रहे हैं. एक तरफ़, वे कहते हैं कि संविधान सर्वोच्च है, लेकिन फिर भी वे हमारी मातृभूमि की स्तुति नहीं करना चाहते.”


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-भारत एक्सप्रेस



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